पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी की वजह से जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज काफी हद तक बंद था, तब अमेरिका खाड़ी इलाके से कच्चे तेल के शिपमेंट को बाहर लेकर जाने के लिए ईरान के ही एक पुराने तरीके का इस्तेमाल किया.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खुफिया तरीके में शिप-टू-शिप यानी जहाज से जहाज में सीधे तेल का ट्रांसफर किया जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान हथियारों से लैस हवाई और समुद्री ड्रोन पहरेदारी करते हैं और शटलिंग तकनीक के जरिए तेल को ट्रांसफर किया जाता था. यह वही तरीका है जिसका इस्तेमाल ईरान काफी सालों से प्रतिबंधों से बचने के लिए करता आ रहा है.
सीक्रेट तरीके से 92 जहाज कर चुके हैं तेल ट्रांसफर
रिपोर्ट के मुताबिक, जब शिपिंग डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों की समीक्षा की गई, तब पता चला कि इस तकनीक का इस्तेमाल करके तेल को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया मई महीने से शुरू हुई थी और अब तक कम से कम 92 जहाज इस सीक्रेट तरीके से तेल ट्रांसफर करने के अभियान में शामिल हो चुके हैं. वहीं, अमेरिकी सेना ने खाड़ी क्षेत्र में तेल निर्यात को जारी रखने के लिए ऐसे सीक्रेट टांसफर्स की निगरानी की, जबकि ईरान की तरफ से लगाए गए ब्लोकेड की वजह से होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति काफी ज्यादा तनावपूर्ण बनी हुई थी.
बीच समुद्र में जहाज से जहाज में कैसे होता था ऑयल ट्रांसफर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से यूं तो अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति काफी ज्यादा प्रभावित रही, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी सेना ने इस हफ्ते तक सीक्रेट तरीके का इस्तेमाल करते हुए ऑयल ट्रांसफर के अभियान को जारी रखा. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 जून, 2026 की सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में दो जगहों पर एक साथ 17 जोड़े जहाजों को ऑयल ट्रांसफर करते हुए देखा गया.
तेल ट्रांसफर के लिए कौन से थे दो प्रमुख स्थान?
इस प्रक्रिया को सफल तरीके से पूरा करने के लिए दो ऐसे प्रमुख स्थान चुने गए, जहां होने वाली गतिविधियों पर किसी का ध्यान न पड़ सके और जिन दो जगहों पर इस अभियान को अंजाम दिया जाता था, उसमें से पहला स्थान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह तट के पास और दूसरा ओमान के सोहार पोर्ट के नजदीक तटीक इलाका था. ये दोनों जगह पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी की तरफ से निर्धारित बाउंड्रियों के पास थे. इस ईरानी अथॉरिटी के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी है.
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