‘भारत को स्कूल का बच्चा समझना ट्रंप की जाहिल…’, नई दिल्ली पर टैरिफ लगाने पर इस शख्स ने अमेरिकी राष्ट्रपति को सुना डाला


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर रूस से तेल आयात करने को लेकर लगाए गए टैरिफ की चारों ओर से आलोचना हो रही है. अमेरिका के कई पूर्व नेताओं के साथ कई अर्थशास्त्रियों ने भी ट्रंप के इस कदम को बेवकूफी भरा कहा है. वहीं, अब एक अमेरिकी पत्रकार ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को लेकर ट्रंप की नीति को अपमानजनक और जाहिलपन से भरा हुआ कहा है.

अमेरिकी पत्रकार रिक सांचेज ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका को भारत के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए जैसा कि वह स्कूल जाने वाला बच्चा हो. उन्होंने कहा, ‘भारत कोई स्कूल जाने वाला नहीं, बल्कि एक बड़ा लडका है.’ उन्होंने कहा, ‘डोनाल्ड ट्रंप के फैसले अक्सर जलन, दुर्भावना और अवैज्ञानिक सोच से उपजे होते हैं. मैं भारत की सराहना करता हूं कि वह ट्रंप के इस कदम के खिलाफ अपने फैसले पर अडिग खड़ा है.’

सेकेंड्री टैरिफ की अमेरिकी नीति को ज्यादातर लोग समझते हैं बेतुका- सांचेज

सांचेज ने कहा, ‘सेकेंड्री टैरिफ को लेकर अमेरिका की नीति ज्यादातर लोगों के नजरिए में बेहद बेतुका है.’ उन्होंने भारत के साथ इस तरह के व्यवहार किए जाने पर अमेरिका के नजरिए की इस तरह से आलोचना कि जैसे अमेरिका को अपने फैसले लेने की प्रक्रिया में एक सुपरविजन की जरूरत हो.

भारत पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर क्या बोले सांचेज?

सांचेज ने कहा कि भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदने और अपने तेल आपूर्तिकर्ताओं को स्वतंत्र रूप से चुनने के अधिकार के महत्व पर जोर देते हुए इसे एक परिवर्तनकारी और खतरनाक क्षण कहा. उन्होंने कहा, ‘यह (ट्रंप प्रशासन की) एक अपमानजनक और अज्ञानता से भरी हुई नीति है, क्योंकि वे रूस के नजरिए से यूक्रेन युद्ध के कारणों को नहीं समझते हैं. लेकिन आपको (ट्रंप प्रशासन को) इस बात का ध्यान रखना होगा, जिस पर कुछ हद तक प्रधानमंत्री मोदी ने ध्यान दिया है, कि कोई भी नीति अपमानजनक तब हो जाती है जब आप भारत जैसे एक देश को स्कूल जाने वाला बच्चा समझने लगते हैं, जिसका पार अपना एक उज्जवल इतिहास, संसाधन और क्षमता रहा है. यह बिल्कुल ऐसा ही है जैसे वे भारत के साथ एक स्कूली बच्चे की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जिन्हें यह बताए जाने की जरूरत है कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए. लेकिन भारत कोई स्कूल का बच्चा नहीं है, वो एक बड़ा लड़का है.‘

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