‘H-1B वीजा पर ऐसी जंग छेड़ दूंगा, जिसकी कल्पना…’, ट्रंप ने बढ़ाई फीस तो वायरल हुआ एलन मस्क का पुराना ट्वीट


अमेरिका के ट्रंप प्रशासन की तरफ से H-1B वीजा को लेकर भारी भरकम फीस लगाने से नया बवाल शुरू हो गया है, क्योंकि इससे सबसे ज्यादा भारतीय कामगार प्रभावित होंगे. विवाद भले ही अब शुरू हुआ हो, लेकिन अमेरिकी टेक दिग्गज एलन मस्क ने पिछले साल दिसंबर में कहा था, “मैं इस मुद्दे पर ऐसी जंग छेड़ दूंगा जिसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकते.” उन्होंने स्पष्ट किया कि H-1B वीजा न केवल उनकी कंपनियों बल्कि अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के लिए भी बेहद जरूरी है. 

मस्क ने H-1B वीजा की अहमियत को लेकर कहा, “मैं अमेरिका में इसलिए हूं और मेरे जैसे कई अहम लोग हैं जिन्होंने SpaceX, Tesla और सैंकड़ों कंपनियां बनाकर अमेरिका को मजबूत किया, यह सब H-1B वीजा की वजह से संभव हुआ है.” मस्क ने गुस्से में कहा कि मैं इस मुद्दे पर ऐसी जंग छेड़ दूंगा, जिसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकते. 

H-1B वीजा के बड़े समर्थक हैं मस्क

मस्क कंपनियों की सफलता के लिए विदेशी कामगारों पर भरोसा करते हैं और H-1B वीजा का बहुत समर्थन करते हैं. टेक कंपनियां जैसे अमेजन, कॉग्निजेंट और इंफोसिस भी H-1B वीज़ा के जरिए कुशल कामगारों को अपनी टीम में शामिल करती हैं. H-1B वीज़ा प्रोग्राम के बड़े समर्थक मस्क इसे अपने निजी अनुभव और कारोबारी जरूरतों दोनों के आधार पर समर्थन देते हैं. 

मस्क H-1B वीजा पर आए थे अमेरिका 

एलन मस्क ने अपने करियर की शुरुआत H-1B वीजा पर अमेरिका आकर की थी. मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि वे उन लोगों में से हैं जिन्होंने H-1B वीजा पर आकर टेस्ला, स्पेसएक्स और कई अन्य कंपनियां बनाई और अमेरिका को मजबूत किया. उन्होंने कहा कि इसके समर्थन में वे जरूरत पड़ी तो संघर्ष करने के लिए भी तैयार हैं.

क्या है H-1B वीजा

H-1B वीजा एक तरह का अस्थायी वर्क परमिट है, जो अमेरिका की कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने की परमिशन देता है. अगर कोई विदेशी कर्मचारी किसी टेक कंपनी या दूसरी बड़ी कंपनी में विशेष काम करने के लिए आता है, तो उसे H-1B वीज़ा मिलता है. ये वीज़ा आमतौर पर तीन साल के लिए होता है, जिसे बढ़ाकर छह साल तक किया जा सकता है. 

मस्क की क्या है राय?

एलन मस्क ने इससे पहले कहा था कि यह सिस्टम ब्रोकन है और इसमें बड़े सुधारों की ज़रूरत है. उन्होंने सुझाव दिया है कि H-1B वीजा धारकों की न्यूनतम सैलरी बढ़ाई जाए और वीजा बनाए रखने के लिए सालाना फीस लगाई जाए. जब कुछ लोग H-1B सिस्टम की आलोचना कर रहे थे, तो मस्क ने कहा कि यह प्रोग्राम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उन्हीं जैसे लोगों ने अमेरिका को टेक्नॉलॉजी, इनोवेशन और नई कंपनियों से मजबूत बनाया है. 

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