देश को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. गांधीजी की हत्या के बाद देश ही नहीं दुनियाभर में शोक की लहर दौड़ गई थी. अहिंसा के पुजारी गांधी जी की हत्या पर भारत का बंटवारा कर पाकिस्तान की मांग करने वाले मोहम्मद अली जिन्ना मे भी दुख जताया था. जिन्ना ने कहा था, ‘दुनिया ने एक महान व्यक्ति को खो दिया है.’
गांधी जी की हत्या के अगले दिन जिन्ना ने अपने शोक संदेश में उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें ‘महान व्यक्ति’ बताया. हालांकि जिन्ना और गांधी के बीच विभाजन के मुद्दे पर तीखे वैचारिक मतभेद रहे थे, लेकिन जिन्ना ने गांधी की हत्या को एक गंभीर और दुखद घटना बताया. पाकिस्तान सरकार ने इस मौके पर आधिकारिक रूप से शोक व्यक्त किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.
मोहम्मद अली जिन्ना ने दिया शोक संदेश
जिन्ना ने शोक जताते हुए कहा था, ‘मैं इस जानकारी पर सदमे में हूं कि महात्मा गांधी पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें उनका निधन हो गया है. हमारे राजनीतिक मतभेद चाहे जितने भी हों, वे हिंदू समुदाय में पैदा होने वाले महान व्यक्ति और नेता थे, जिनपर हिंदू समुदाय को पूरा भरोसा था.’
जिन्ना ने आगे कहा, ‘मैं अपना गहरा दुःख व्यक्त करना चाहता हूं, हिंदुस्तान और पाकिस्तान की आजादी के तुरंत बाद इस महत्वपूर्ण, ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण मोड़ पर महान हिंदू समुदाय और उनके परिवार के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त करता हूं. भारत के प्रभुत्व की क्षति अपूरणीय है और इस समय ऐसे महान व्यक्ति के निधन से उत्पन्न शून्य को भरना बहुत कठिन होगा.’
‘हिंदू’ शब्द को लेकर जिन्ना की आलोचना
हालांकि बयान में महात्मा गांधी को ‘हिंदू’ शब्द जोड़कर संबोधित करने के कारण जिन्ना की काफी आलोचना भी हुई थी. जिन्ना ने महात्मा गांधी के निधन के बाद उन्हें श्रद्धांजलि भी दी थी. जिन्ना की श्रद्धांजलि इसलिए भी अहम थी, क्योंकि बापू पाकिस्तान बंटवारे के खिलाफ थे और वह कांग्रेस को पीछे हटने और जिन्ना को पहली सरकार बनाए देने के लिए भी तैयार थे.
लियाकत अली खान ने भी जताया था शोक
बता दें कि सिर्फ जिन्ना ही नहीं, 4 फरवरी 1948 के सत्र में, सदन के नेता लियाकत अली खान ने भी महात्मा गांधी की मृत्यु को लेकर शोक जताया. उन्होंने कहा, ‘मैं गहरे दु:ख के साथ गांधी जी की मृत्यु के बारे में बात करने के लिए खड़ा हुआ हूं. वह हमारे समय के महापुरुषों में से एक थे.’
उन्होंने यह कहते हुए अपना भाषण समाप्त किया, ‘हम आशा करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि गांधी जी अपने जीवनकाल में जो कुछ हासिल नहीं कर सके, वह उनकी मृत्यु के बाद पूरा हो जाए, यानी इस उपमहाद्वीप में रहने वाले विभिन्न राष्ट्रों के बीच शांति और सद्भाव स्थापित हो जाए.’
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