पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कई दिनों तक चली हिंसक झड़पों के बाद दोनों पक्षों ने संघर्ष रोकने पर सहमति जताई थी. रविवार (19 अक्टूबर) को कतर और तुर्की की मध्यस्थता में दोहा में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की मुलाकात हुई. इस मुलाकात के बाद कतर ने एक बयान जारी कर बताया था कि दोनों पक्ष आगे की वार्ता और सहयोग के लिए सहमत हैं.
पाकिस्तान के लिए इस खुशखबरी के तुरंत बाद कतर ने बयान में संशोधन कर दिया, जिससे पाकिस्तान को अप्रत्याशित झटका लगा. शुरूआती बयान में कतर ने युद्धविराम पर चर्चा करते समय अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन का उल्लेख किया था. डूरंड लाइन एक काल्पनिक सीमा है जो ब्रिटिश औपनिवेशिक दौर में बनाई गई थी और अफगानिस्तान कभी इसे मान्यता नहीं देता. इसके चलते अफगानिस्तान में इस बयान को लेकर विरोध और व्यापक प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं.
कतर ने अपने बयान से डूरंड लाइन का जिक्र हटाया
बाद में कतर ने अपने बयान से डूरंड लाइन का जिक्र हटा दिया. कतर के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए संशोधित बयान में अब यह सीमा उल्लेखित नहीं है. अमेरिका के अफगानिस्तान विशेष दूत रहे जल्मे खलीलजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बताया कि कतर ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम पर अपने पहले के बयान को बदल दिया है.
क्या बोले अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री?
इस बीच अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब मुजाहिद ने दोहा से ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वार्ता के दौरान डूरंड लाइन पर कोई चर्चा नहीं हुई. उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते में डूरंड लाइन का कोई उल्लेख नहीं है और यह केवल दोनों देशों का आंतरिक मामला है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान कोई हमला करता है,# तो अफगानिस्तान जवाबी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा.
डूरंड लाइन को लेकर विवाद लंबे समय से जारी है. अफगानिस्तान इसे कभी स्वीकार नहीं करता, जबकि पाकिस्तान इसे वास्तविक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है. इस असहमति के कारण दोनों देशों की सीमाओं पर कई बार हिंसक झड़पें हो चुकी हैं.
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