बांग्लादेश के आम चुनाव में 299 सीटों पर वोटिंग जारी है. यहां एक ऐसे नेता का नाम काफी विवादों में रहा है, जिसने भारत के खिलाफ जहर उगला. बांग्लादेश की नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के नेता हसनत अब्दुल्ला ने भारत–बांग्लादेश संबंधों में आग में घी डालने का काम किया था. हसनत अब्दुल्ला ने कहा था कि बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश की गई तो उसका असर सीमाओं के बाहर तक जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि जो ताकतें बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही हैं, उन्हें भारत में शरण मिल रही है.
अब्दुल्ला ने अपने बयान में कहा था कि अगर भारत ऐसी ताकतों को संरक्षण देता है तो बांग्लादेश भी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, जिन्हें सेवन सिस्टर्स कहा था उन्हें अलग कर देगा और वहां रहने वाले अलगाववादियों को बांग्लादेश में शरण दी जाएगी. भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा हैं. इन राज्यों की सुरक्षा स्थिति ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील रही है.
भारत पर लगाए गए आरोप
अपने भाषण में हसनत अब्दुल्ला ने दावा किया था कि बांग्लादेश में चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करने और उम्मीदवार उस्मान हादी पर हुए हमले के पीछे जिन लोगों का हाथ है, उन्हें भारत का समर्थन प्राप्त है. उन्होंने सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों की मौत के मामलों में भी भारतीय एजेंसियों की भूमिका का आरोप लगाया था. हालांकि इन आरोपों पर भारत की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
बदले हुए राजनीतिक हालात
विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में बदलाव के बाद भारत को लेकर बयानबाजी का स्वर बदला है. शेख हसीना के सत्ता से हटने और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में नई व्यवस्था आने के बाद कुछ नेताओं के बयानों में भारत के प्रति कड़ा रुख देखा गया है. इससे पहले मोहम्मद यूनुस का एक बयान भी चर्चा में रहा था, जिसमें उन्होंने पूर्वोत्तर भारत को लैंड-लॉक्ड बताते हुए कहा था कि समुद्र तक पहुंच के लिए बांग्लादेश अहम मार्ग हो सकता है. उस बयान पर भी भारत में प्रतिक्रिया हुई थी.
रिश्तों पर संभावित असर
पिछले कुछ वर्षों में भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है. ऐसे में इस तरह के बयान दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा कर सकते हैं. कई बार ऐसे बयान घरेलू राजनीति से जुड़े होते हैं, लेकिन उनका असर क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है. कुल मिलाकर, सेवन सिस्टर्स को लेकर दिया गया यह बयान भारत–बांग्लादेश संबंधों के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है. अब यह देखना होगा कि दोनों देश कूटनीतिक स्तर पर इस स्थिति को किस तरह संभालते हैं.