Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश में तारिक राज! जमात को NCP को कितनी सीटें, किसकी हुई जमानत जब्त, जानें 10 बड़ी बातें


बांग्लादेश में हुए संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शुक्रवार को जबरदस्त जीत दर्ज की . इसके साथ ही पिछले करीब 18 महीनों से चले आ रहे अस्थिर दौर के बाद देश में स्थिरता की उम्मीद जगी है . गुरुवार को हुए मतदान के नतीजों में BNP भारी बहुमत की ओर बढ़ती दिखी, जिससे लंबे समय से देश से बाहर रह रहे तारिक रहमान के अगले प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है .

पिछले तीन दशकों में यह पहली बार हुआ जब अवामी लीग का चुनाव निशान ‘नाव’ बैलेट पेपर पर नहीं था . इस बार BNP का सीधा मुकाबला जमात-ए-इस्लामी और युवाओं की बनी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेतृत्व वाले 11-पार्टी गठबंधन से था .

तारिक रहमान करीब 17 साल से निर्वासन में थे और अब वे देश में कानून का राज मजबूत करने और गारमेंट्स सेक्टर को फिर से रफ्तार देने का वादा कर रहे हैं. उन्होंने इसे देश के लिए ‘नया रास्ता’ बताया है . वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने पूरी ताकत लगाई, लेकिन पहले से आ रहे आकलन के मुताबिक वह सरकार बनाने की स्थिति में नहीं दिखी .

बांग्लादेश चुनाव की 10 बड़ी बातें:

1. बीएनपी ने 209 सीटें जीतीं. जमात-ए-इस्लामी ने 68, एनसीपी ने 6, बांग्लादेश खिलाफत मजलिस ने 2, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश ने 1, गण अधिकार ने 1, बीजेपी ने 1, गण संघित ने 1, खिलाफत मजलिस ने 1 और निर्दलीयों ने 7 सीटें जीतीं.

2. बांग्लादेश में कुल 350 संसदीय सीटें हैं . इनमें 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिन पर सीधे वोट नहीं पड़ते . 300 सीटों पर मतदान होता है, लेकिन एक उम्मीदवार के निधन के कारण इस बार 299 सीटों पर ही वोट पड़े . शेरपुर-3 सीट पर बाद में मतदान होगा . महिलाओं की 50 सीटें जनरल सीटों में पार्टियों के प्रदर्शन के आधार पर तय होती हैं.

3. आजादी के बाद यह पहला चुनाव था, जिसमें दोनों पूर्व प्रधानमंत्री मैदान में नहीं थे न तो शेख हसीना और न ही खालिदा जिया . खालिदा जिया का पिछले साल के आखिर में निधन हो गया था, जबकि शेख हसीना अगस्त 2024 के बाद भारत आ गई थीं .

4. अवामी लीग को इस बार चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था, जबकि पार्टी के पास अब भी करीब 35-40 प्रतिशत वोट माने जाते हैं . कुल वोटिंग करीब 48 प्रतिशत रही, जिससे साफ है कि बहिष्कार की अपील का असर पड़ा . इससे यह भी दिखता है कि शेख हसीना की पार्टी की जड़ें अभी भी मजबूत हैं .

5. BNP का मुख्य मुकाबला जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-पार्टी गठबंधन से था . पहले जमात, BNP के साथ चुनाव लड़ती थी . इस बार छात्रों की बनाई NCP भी जमात के साथ थी, लेकिन वह कोई खास असर नहीं दिखा पाई . छात्र नेताओं में आपसी खींचतान भी दिखी .

6. BNP के गायेश्वर चंद्र रॉय, 1971 के बाद ढाका से पहले हिंदू सांसद बन सकते हैं . उनके ढाका-3 सीट से अच्छे अंतर से जीतने की उम्मीद है .

7. इस बार दो वोट डाले गए-एक सांसद चुनने के लिए और दूसरा मोहम्मद यूनुस के ‘जुलाई चार्टर रेफरेंडम’ के लिए . जुलाई चार्टर का मकसद संसद व्यवस्था में सुधार है . इसमें दो सदनों वाली संसद, एक व्यक्ति के लिए दो बार से ज्यादा प्रधानमंत्री न बनने का नियम और चुनाव से 90 दिन पहले केयरटेकर सरकार जैसी बातें शामिल हैं . सभी बड़ी पार्टियों ने इसका समर्थन किया है .

8. स्थानीय ब्रॉडकास्टर जमुना टीवी के मुताबिक, BNP और उसके सहयोगियों ने 211 सीटें जीत ली हैं और संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है . जमात-ए-इस्लामी गठबंधन को 70 सीटें मिली हैं, जबकि दूसरी पार्टियों को छह सीटें . 299 में से 287 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं . BNP गठबंधन में गोनो ओधिकार पोरीशाद और गोनो सोंगहोटी आंदोलन भी शामिल हैं .

9. BNP चेयरमैन तारिक रहमान ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से जुमे की नमाज के बाद पूरे देश में खास दुआ करने की अपील की है . साथ ही उन्होंने जीत की रैली या सार्वजनिक जश्न न मनाने को कहा है . यह जानकारी उनके प्रेस सेक्रेटरी सालेह शिबली ने दी .

10. जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान ने गुरुवार को कहा कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहे तो पार्टी नतीजे मान लेगी . ढाका-15 के लिए पार्टी के मुख्य चुनाव कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, ‘शुरुआती नतीजे आ रहे हैं . अभी कोई आखिरी बात कहना जल्दी है, लेकिन हमें लोगों पर भरोसा है . कुछ संकेत मिल रहे हैं, पर कोई गारंटी नहीं . देश का हित हमारी पहली प्राथमिकता है . ज्यादातर इलाकों में शुरुआती नतीजों में हम आगे हैं . थोड़ा और इंतजार करना होगा .’



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