Boeing 707 plane crash over Mount Fuji: हवाई दुर्घटनाएं हमेशा ही बेहद खतरनाक होती हैं. इसमें से कुछ हादसे ऐसे होते हैं तो दशकों तक लोगों के दिमाग में रहते हैं. इसी तरह का एक हादसा जापान के माउंट फूजी के ऊपर हुआ था. 5 मार्च 1966 को जापान के माउंट फूजी के ऊपर ब्रिटिश ओवरसीज एयरवेज कॉरपोरेशन (BOAC) की फ्लाइट 911, एक बोइंग 707 विमान, दुखद हादसे का शिकार हुई.
यह विमान 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर रहा था, जब अचानक तेज हवाओं के कारण यह दो हिस्सों में बंट गया और आग के गोले में तब्दील हो गया. इस भयावह दुर्घटना में कुल 124 लोग मारे गए थे, जिनमें यात्री और क्रू मेंबर शामिल थे.
हांगकांग के लिए भारी थी उड़ान
BOAC की यह फ्लाइट लंदन से हांगकांग के लिए उड़ी. इस फ्लाइट को मॉन्ट्रियल, सैन फ्रांसिस्को, होनोलूलू और टोक्यो में रुकना था. 4 मार्च की रात को विमान टोक्यो पहुंचा, जहां मौसम खराब था, लेकिन तेज हवाओं के कारण बाद में आसमान साफ हो गया. पायलट ने बेहतर दृश्यता के चलते उड़ान जारी रखने का निर्णय लिया.
माउंट फूजी के खतरनाक वायुमंडलीय परिस्थितियां
माउंट फूजी जो 12,388 फीट (3,776 मीटर) ऊंचा है, अपने अप्रत्याशित मौसम के लिए जाना जाता है. विमान जब 16,000 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा तो यह माउंट फूजी के आसपास की तेज और गर्म हवाओं की चपेट में आ गया. विशेषज्ञों के अनुसार, माउंट फूजी के ऊपर बनने वाले विशेष वायुमंडलीय दबाव के कारण अचानक अत्यंत शक्तिशाली हवा के झोंके उठते हैं, जो इस दुर्घटना का मुख्य कारण बने.
आग के गोले में बदला विमान
तेज हवाओं के दबाव को सहन न कर पाने के कारण विमान आसमान में ही दो हिस्सों में बंट गया और एक जोरदार विस्फोट के साथ आग के गोले में बदल गया. विमान का मलबा तेजी से नीचे गिरा, जिससे सभी 124 लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गई.
इस दुर्घटना की जांच में पाया गया कि माउंट फूजी के आसपास की तेज हवाओं के कारण विमान के ढांचे पर अत्यधिक दबाव पड़ा, जिससे यह टूट गया. यह हादसा जापान में एक महीने के भीतर तीसरी बड़ी विमान दुर्घटना थी, जिसने वैश्विक विमानन उद्योग को हिला कर रख दिया और विमान संरचना की मजबूती पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर किया.