GPS Spoofing: दिल्ली से मुंबई तक कई एयरपोर्ट निशाने पर, सरकार ने संसद में माना खतरा बढ़ा, लगातार बढ़ रहे साइबर खतरे


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संसद में केंद्र सरकार ने माना है कि देश के कई बड़े एयरपोर्ट्स जिनमें दिल्ली का IGI एयरपोर्ट भी शामिल है, उनके आस पास GPS Spoofing और GNSS इंटरफेरेंस की घटनाएं सामने आई हैं. इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे 10 की ओर आने वाली कुछ उड़ानों ने रिपोर्ट किया कि एप्रोच के दौरान GPS आधारित नेविगेशन सिस्टम गलत संकेत देने लगे थे. ऐसे मामलों में पायलटों को तुरंत कंटिजेंसी प्रक्रियाओं पर स्विच करना पड़ा, जिसके चलते विमान सुरक्षित रूप से लैंड कर पाए.

मोदी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्य रनवे और पारंपरिक नेविगेशन सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे थे इसलिए उड़ानों की मूवमेंट पर कोई असर नहीं पड़ा. DGCA ने इस तरह की घटनाओं के बाद कई कदम उठाए हैं. 24 नवंबर को GNSS इंटरफेरेंस को लेकर विशेष एडवाइजरी जारी की गई थी. इसके अलावा DGCA ने 10 नवंबर 2025 को एक नई Standard Operating Procedure (SOP) लागू की, जिसमें GPS Spoofing और GNSS इंटरफेरेंस की रियल-टाइम रिपोर्टिंग की अनिवार्यता शामिल है. इसका उद्देश्य है कि हर असामान्य GPS गतिविधि को तुरंत चिन्हित किया जा सके और एयर ट्रैफिक सिस्टम समय रहते प्रतिक्रिया कर सके.

AAI ने क्या बताया?

एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए Wireless Monitoring Organization (WMO) को निर्देश दिए हैं कि वे इंटरफेरेंस और स्पूफिंग के स्रोत का पता लगाएं. संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, एक उच्च-स्तरीय बैठक में WMO को विशेष रूप से अधिक संसाधन लगाने और DGCA तथा AAI द्वारा साझा किए गए लोकेशन डेटा के आधार पर स्पूफिंग के संभावित स्रोत को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं.

GPS इंटरफेरेंस का खतरा बढ़ा

सरकार ने यह भी बताया कि नवंबर 2023 से DGCA द्वारा रिपोर्टिंग अनिवार्य किए जाने के बाद से देश के कई अन्य प्रमुख एयरपोर्ट्स से भी ऐसे मामलों की सूचनाएं आने लगी हैं. इनमें कोलकाता, मुंबई, अमृतसर, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े हवाई अड्डे शामिल हैं. GPS इंटरफेरेंस का खतरा केवल एक शहर तक सीमित नहीं बल्कि यह एक युद्ध स्तर की चुनौती है.

इन घटनाओं के बावजूद भारत का Minimum Operating Network (MON) एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. यह नेटवर्क पारंपरिक और ग्राउंड-बेस्ड नेविगेशन सिस्टम का समूह है, जो GPS में गड़बड़ी होने पर भी उड़ानों की सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करता है. 

साइबर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं

सरकार के मुताबिक, यही वजह है कि स्पूफिंग के मामलों के बावजूद समग्र उड़ान सुरक्षा प्रभावित नहीं हुई. सरकार ने यह भी बताया कि आज की विमानन दुनिया में साइबर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं, जिनमें रैनसमवेयर और मालवेयर जैसे हमले प्रमुख हैं. इनसे निपटने के लिए AAI ने IT नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए उन्नत साइबर सुरक्षा समाधान लागू किए हैं.

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