अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है. जैसे ही युद्ध और सप्लाई रुकने का खतरा बढ़ता है, तेल बाजार में हलचल शुरू हो जाती है. इसका सीधा फायदा तेल और गैस कंपनियों को मिलता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह फायदा लंबे समय तक रहेगा और क्या कंपनियां नए प्रोजेक्ट्स में बड़ा निवेश करेंगी?
जब दुनिया में किसी बड़े इलाके में तनाव बढ़ता है और तेल की सप्लाई रुकने का डर होता है, तो कीमतें तेजी से बढ़ती हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ऐसा हुआ था. साल 2022 की तीसरी तिमाही में ExxonMobil और Chevron ने मिलकर 30 अरब डॉलर से ज्यादा का मुनाफा कमाया था, क्योंकि उस समय तेल और गैस के दाम ऊंचे थे.
कच्चा तेल की कीमत में उछाल
हाल की स्थिति में ब्रेंट कच्चा तेल कुछ समय के लिए 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया. यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतें भी 2023 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. इसकी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट का लगभग बंद होना है. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. कतर की ओर से एलएनजी उत्पादन रोकने से गैस बाजार में भी दबाव बढ़ा है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तभी कंपनियां नए तेल कुएं खोदने या बड़े प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला करेंगी. बड़े प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश होता है और उन्हें शुरू होने में महीनों या कई साल लग सकते हैं. डैन पिकरिंग के मुताबिक, अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा तो तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है, लेकिन यह अभी तय नहीं है.
अमेरिकी नेवी तेल टैंकरों की सुरक्षा करेगी: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नेवी तेल टैंकरों की सुरक्षा करेगी और शिपिंग को बीमा सहायता भी दी जाएगी. इस बयान के बाद कीमतों में थोड़ी नरमी आई. अगर अमेरिका, चीन या अन्य देश अपने आपातकालीन तेल भंडार बाजार में जारी करते हैं, तो कीमतें और नीचे आ सकती हैं. फिलहाल बाजार इसे छोटी अवधि की समस्या मान रहा है.
अमेरिकी तेल और गैस उद्योग को ऊंची कीमतों से फायदा जरूर होगा, लेकिन वे तुरंत मध्य पूर्व की सप्लाई की कमी पूरी नहीं कर सकते. अमेरिका के गल्फ कोस्ट रिफाइनर पहले से बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं क्योंकि पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ी है. एलएनजी निर्यातकों को भी फायदा हुआ है.