भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत खत्म हो चुकी है. इस बैठक में यूएस की ओर से चीफ नेगोशिएटर के रूप में ब्रेंडन लिंच शामिल हुए, जोकि साउथ और मिडिल एशिया में अमेरिका के बिजनेस प्रतिनिधि हैं, जबकि भारत की ओर से एडिशनल सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल शामिल थे. अमेरिकी दूतावास ने बताया कि द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को लेकर हुई ये बैठक सकारात्मक रही. यूएस निगोशिएशन टीम के साथ यह बैठक 7 घंटे तक चली.
ब्रेंडन लिंच अपने भारतीय समकक्ष के साथ एक दिवसीय वार्ता के लिए सोमवार (15 सितंबर 2025) देर रात नई दिल्ली पहुंचे. रूसी कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद किसी उच्च पदस्थ अमेरिकी व्यापार अधिकारी की यह पहली यात्रा है. भारत ने 50 फीसदी के भारी शुल्क को अनुचित बताया है.
अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर छठे दौर की वार्ता पूरी हुई
फरवरी में दोनों देशों के नेताओं ने अधिकारियों को प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत करने का निर्देश दिया था. समझौते के पहले चरण को 2025 के अंत तक पूरा करने की योजना थी. पांच दौर की वार्ता पहले ही हो चुकी है थी और छठे दौर की वार्ता 25-29 अगस्त तक होनी थी, लेकिन 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था. अब 16 सितंबर को छठे दौर की वार्ता भी हो गई.
सकारात्मक रही बातचीत
वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि इस बैठक में व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंजाम तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया. बयान में कहा गया, “भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत सकारात्मक और दूरदर्शी रही. इसमें कई पहलुओं को शामिल किया गया.”
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ब्रेंडन लिंच और भारतीय अधिकारियों के बीच बैठक को छठे दौर की वार्ता के रूप में नहीं, बल्कि उससे पहले की बातचीत के रूप में देखा जाना चाहिए. रूस से कच्चे तेल की खरीद का बचाव करते हुए भारत यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार से प्रेरित है. सरकार ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि वह सभी व्यापार समझौतों में अपने किसानों, डेयरी उत्पादकों और एमएसएमई के हितों की रक्षा करेगी.
ये भी पढ़ें : ‘आप भगवान से ही प्रार्थना कीजिए’, जानें मुगल काल में खंडित मूर्ति को दोबारा स्थापित करने की मांग पर SC ने ऐसा क्यों कहा?