संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब समेत खाड़ी क्षेत्र में रमजान का पवित्र महीना शुरू हो गया है. 18 फरवरी को यहां पहला रोजा रखा जाएगा. इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने रमजान को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. यहां की अल अक्सा मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने के लिए 10 हजार फिलिस्तीनी मुस्लिमों को इजाजत दी गई है. यह मस्जिद पूर्वी यरूशलम में आती है, जिसे मुस्लिम अपने तीसरे सबसे पवित्र स्थान के तौर मानते हैं. हालांकि इजरायल ने इसमें एक शर्त भी जोड़ी है.
मिडिल ईस्ट में रमजान की शुरुआत बुधवार (17 फरवरी) से हो रही है. ऐसे में इजरायल की ओर से लिया गया यह फैसला बेहद खास माना जा रहा है. हालांकि इजरायल की ओर से अल अक्सा मस्जिद में नमाज पढ़ने को लेकर दी गई परमिशन में एक शर्त भी लगाई गई है, जिसमें पुरुष, महिलाओं और बच्चों की उम्र तय गई है, जो मस्जिद में नमाज अदा कर पाएंगे. मस्जिद में पुरुष मुस्लिमों के नमाज पढ़ने की उम्र 55 साल से ज्यादा तय की गई है, महिलाओं के लिए यह 50 साल से ज्यादा है, जबकि बच्चों के लिए 12 साल की आयुसीमा तय की गई है.
बनवाना होगा डेली परमिट
जुमे की नमाज के लिए 10 हजार लोगों को आने की इजाजत दी जाएगी. इसमें शामिल होने वाले लोगों को पहले से डेली परमिट बनवाना होगा. बिना परमिट बनवाए किसी भी शख्स को मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए परमिशन नहीं दी जाएगी. इजरायल के रक्षा मंत्रालय की ओर से बयान जारी कर इसकी जानकारी दी गई है.
इलरायल का नियंत्रण
पूर्वी यरूशलम में स्थित अल-अक्सा मस्जिद और इसके आसपास के इलाके पर साल 1967 से इजारायल का कंट्रोल है. यहां के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी इजरायल ही संभालता है. खास बात यह भी है कि इस मस्जिद का मैनेजमेंट जॉर्डन के वक्फ बोर्ड करता है. मुस्लिम इसे अपना तीसरे सबसे पवित्र स्थान मानते हैं जबकि यहूदी भी इस पर दावा करते हैं और इसे टेंपल माउंट बताते हैं.