क्या अमेरिका के साथ डील करने पर ईरान को मिलेगा फंड? बातचीत के बीच जेडी वेंस ने सब कर दिया साफ


अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शुक्रवार को उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि ईरान को वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौते पर साइन करने के लिए भारी भरकम रकम दी जाएगी. उन्होंने ऐसे दावों को फर्जी जानकारी बताया है.

एक्स पर एक पोस्ट में वेंस ने कहा कि होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के मकसद से हुई डील को लेकर कोई नकद भुगतान या फंड जारी करने की शर्त नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था को इस तरह से तैयार किया गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के सुरक्षा हितों को प्राथमिकता दी जा सके. 

उन्होंने कहा कि मैं अमेरिका ईरान डील को लेकर संभावित समझौते के बारे में बहुत सारी गलत जानकारी देख रहा हूं. सबसे पहली बात ईरानियों को कोई नकद पैसा नहीं मिल रहा है और न ही सिर्फ़ समझौते पर हस्ताक्षर करने या किसी बैठक में शामिल होने के लिए कोई फंड जारी किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते को इस तरह से तैयार किया गया है कि अमेरिका की चिंताओं को प्राथमिकता दी जाए और अगर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करता है, तो उन्हें और पूरे क्षेत्र को आर्थिक फ़ायदा होगा. इस समझौते में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदलने और लंबे समय तक शांति बनाए रखने की क्षमता है.

ईरानी मेहर न्यूज़ एजेंसी का क्या है दावा 
बता दें कि यह खबर ईरान की मेहर न्यूज़ एजेंसी की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें ईरान की बातचीत करने वाली टीम के करीबी एक सूत्र के हवाले से कहा गया था कि अमेरिका संग समझौते से ईरान की 24 अरब डॉलर की रुकी हुई संपत्ति 60 दिनों के भीतर जारी हो सकती है. यह भी दावा किया गया है कि बातचीत के अंतिम चरण से पहले तेहरान को इस रकम का आधा हिस्सा मिल जाएगा.

क्या बोले जेडी वेंस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने बातचीत के बारे में बिना पुष्टि वाली रिपोर्टों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के लिए टिप्पणीकारों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मैंने पिछले कुछ घंटों की रिपोर्टिंग में कुछ अजीब बातें देखी हैं. जो लोग पहले डोनाल्ड ट्रंप को एक ऐतिहासिक राष्ट्रपति बता रहे थे, वे अब मीडिया की बिना पुष्टि वाली खबरों के आधार पर एक डील की आलोचना कर रहे हैं. जो लोग कहते हैं कि IRGC की किसी भी बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता, वे ही अब गुमनाम सूत्रों वाली सोशल मीडिया पोस्ट पर यकीन कर रहे हैं. 

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