गोवा अग्निकांड का दोषी कौन? पुलिस कस्टडी में भेजे गए लूथरा ब्रदर्स, गोवा पुलिस करेगी कड़ी पूछताछ


गोवा अग्निकांड मामले में थाईलैंड से भारत लाए गए सौरभ और गौरव लुथरा को बुधवार (17 दिसंबर 2025) को कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने दोनों आरोपियों को अगल पांच दिनों (22 दिसंबर) तक पुलिस हिरासत में भेजा है. पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इस भीषण अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं. जांच में दोनों आरोपियों की संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध में प्रथम दृष्टया संलिप्तता सामने आई है.

पुलिस ने अपनी रिमांड रिपोर्ट में क्या कहा?

1. संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध में प्रथम दृष्टया संलिप्तता: जांच में यह सामने आया है कि अभियुक्तों की इस अपराध में प्रत्यक्ष भूमिका है, जिसके परिणामस्वरूप 25 व्यक्तियों की मृत्यु हुई और कई अन्य लोग घायल हुए.

2. स्वामी और निर्णयकर्ता के रूप में प्रत्यक्ष जिम्मेदारी: अभियुक्त उक्त प्रतिष्ठान के मालिक/भागीदार हैं. वे अपने सहयोगियों के साथ संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, आवश्यक अनुमतियों और परिसर में आयोजित कार्यक्रमों पर पूर्ण नियंत्रण रखते थे और उनके द्वारा किए गए अवैध कृत्यों और चूकों के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार हैं.

3. जोखिम की पूर्ण जानकारी होते हुए भी खतरनाक गतिविधि का आयोजन: अभियुक्तों ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर यह जानते हुए भी कि इससे गंभीर अग्नि दुर्घटना का खतरा है और जनहानि की प्रबल संभावना है, रेस्टोरेंट/क्लब के भीतर बिना किसी सुरक्षा उपाय के आतिशबाजी की अनुमति दी और उसका आयोजन किया.

4. ग्रॉस नेगलिजेन्स और रैश कंडक्ट जिससे मानव जीवन खतरे में पड़ा: अभियुक्तों द्वारा अनिवार्य अग्नि सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और सुरक्षित बुनियादी ढांचे की व्यवस्था नहीं की गई, जो कि ग्रॉस नेगलिजेन्स और रैश कंडक्ट का स्पष्ट उदाहरण है और जिससे मानव जीवन गंभीर खतरे में पड़ा.

5. वैधानिक अनुमति और लाइसेंस के बिना संचालन: जांच में यह भी सामने आया है कि अभियुक्तों ने सक्षम प्राधिकरणों से आवश्यक वैधानिक अनुमति और लाइसेंस प्राप्त किए बिना ही प्रतिष्ठान का संचालन किया, जो स्वयं में एक गंभीर उल्लंघन है और इस घटना में योगदान देने वाला कारक है.

6. आपातकालीन निकास और सुरक्षा ढांचे का अभाव: जिस परिसर में अभियुक्तों और उनके सहयोगियों द्वारा व्यवसाय संचालित किया जा रहा था, वहां ग्राउंड फ्लोर और डेक फ्लोर पर आपातकालीन निकास द्वार उपलब्ध नहीं थे, जो सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति जानबूझकर की गई उपेक्षा और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन दर्शाता है.

7. न्याय और प्रभावी जांच के हित में गिरफ्तारी आवश्यक: उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए, निष्पक्ष और प्रभावी जांच और न्याय के हित में अभियुक्तों की गिरफ्तारी आवश्यक है.

8. अपराध की पुनरावृत्ति को रोकने हेतु: अभियुक्त होटल/रेस्टोरेंट की श्रृंखला के मालिक/भागीदार हैं. उन्हें और उनके सहयोगियों को आगे भी इसी प्रकार की अवैध और खतरनाक गतिविधियां करने से रोकने हेतु पुलिस हिरासत आवश्यक है.

9. उद्देश्य (मोटिव) की जांच हेतु: अपराध के पीछे के वास्तविक उद्देश्य का पता लगाने के लिए अभियुक्तों से गहन पूछताछ आवश्यक है.

10. फरार होने की संभावना: अभियुक्तों और उनके सहयोगियों के देश से बाहर फरार होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. अतः इसे रोकने हेतु भी पुलिस हिरासत आवश्यक है.



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