ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका-यूरोप में खींचतान, NATO चीफ ने ट्रंप से फोन पर की बात, अब स्विट्जरलैंड में होगी बैठक, रूस का भी जिक्र


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियों के बाद दुनिया की राजनीति गरमाई हुई है. इसे लेकर ट्रंप ने स्विटजरलैंड में होनेवाली बैठक पर सहमति जताई, लेकिन ये भी कहा कि वे मामले में पीछे नहीं हटेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड पर अपनी मांग का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की बात को सौ फीसदी पूरा करने की बात कही. वहीं यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर एकजुटता दिखाई है.

ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा नहीं: रूस

एक तरफ डेनमार्क के विदेश मंत्री ने कहा है कि अमेरिका अर्ध-स्वायत्त डेनिश क्षेत्र के स्वामित्व के लिए धमकी नहीं दे सकते तो वहीं ब्रिटेन की विदेश सचिव ने दोहराते हुए कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य ग्रीनलैंडर्स और सिर्फ डेनिश लोगों को तय करना है. इसी बीच ट्रंप ने नाटो महासचिव के साथ बात की और स्विट्जरलैंड के दावोस में बैठक पर सहमति जताई है. वहीं इस पूरे मामले पर रूस ने ग्रीनलैंड को डेनमार्क का हिस्सा नहीं बताते हुए इसे औपनिवेशिक विजय बताया और ये भी कहा कि इस मामले में रूस की हस्तक्षेप करने में कोई रुचि नहीं है.

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड जरूरी: ट्रंप

ट्रंप ने कहा, ‘मैंने सभी को स्पष्ट रूप से बताया है कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय और विश्व सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है.’ अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने विश्वास जताया है कि अमेरिका-यूरोप संबंध मजबूत बने रहेंगे और ग्रीनलैंड अंततः सभी के लिए बहुत अच्छी स्थिति में होगा.

यूएस के राष्ट्रपति किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड को छोड़ने के मूड में नहीं हैं. उन्होंने एक के बाद एक कई सोशल मीडिया पोस्ट में यूरोपीय देशों को निशाने पर लेते हुए साफ किया है कि ताकत के जरिए ही शांति कायम रखी जा सकती है. उन्होंने कहा कि ताकत के जरिए ही दुनिया में शांति कायम की जा सकती है और यह क्षमता सिर्फ अमेरिका के पास है.

अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं: ट्रंप

ट्रंप ने लिखा, ‘मेरी नाटो के सेक्रेटरी जनरल मार्क रूटे के साथ ग्रीनलैंड के बारे में बहुत अच्छी टेलीफोन पर बात हुई. मैं स्विट्जरलैंड के दावोस में अलग-अलग पार्टियों की मीटिंग के लिए सहमत हो गया. जैसा कि मैंने सभी को बहुत साफ-साफ बताया कि ग्रीनलैंड नेशनल और वर्ल्ड सिक्योरिटी के लिए बहुत जरूरी है. अब पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘अमेरिका दुनिया में अब तक का सबसे शक्तिशाली देश है. इसका एक बड़ा कारण मेरे पहले कार्यकाल के दौरान हमारी मिलिट्री का फिर से निर्माण करना है और यह निर्माण और भी तेज गति से जारी है. हम एकमात्र ऐसी शक्ति हैं जो पूरी दुनिया में शांति सुनिश्चित कर सकते हैं और यह बहुत ही आसानी से ताकत के जरिए किया जाता है.’



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