भारत के खिलाफ मोहम्मद यूनुस सरकार के तल्ख तेवरों को तगड़ा झटका लगा है. रविवार (1 फरवरी, 2026) को भारत सरकार ने जो बजट पेश किया है, उसमें टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए तगड़ी घोषणाएं की गई हैं, जिससे बांग्लादेश की रीढ़ की हड्डी यानी उसकी टेक्सटाइल इंटस्ट्री बड़ी बुरी तरह प्रभावित होगी. हाल ही में यूरोपीयन यूनियन के साथ हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग के लिए बड़ा झटका है.
रविवार (1 फरवरी, 2026) को वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया, जिसमें उन्होंने सिल्क प्रोडक्शन, मशीनरी सपोर्ट, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम और टेक्सटाइल सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट की घोषणा की है.
बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक
बजट में लेबर-इंटेंसिव टेक्सटाइल सेक्टर के लिए मजबूत पॉलिसी पर भी जोर दिया गया है, जिसका मकसद आत्मनिर्भरता, रोजगार, इनोवेशन और ग्लोबल कॉम्पटिटिवनेस को बढ़ावा देना है. बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री भारत के लिए हमेशा से चुनौती रही है. बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट का निर्यातक है, जबकि भारत छठे नंबर है. साल 2024 में बांग्लादेश ने 52.9 अरब डॉलर का कपड़ा निर्यात किया था, जबकि भारत ने टेक्सटाइल्स, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट का कुल 37.7 अरब डॉलर का निर्यात किया था.
भारत के बजट से कैसे बांग्लादेश को लगेगा झटका?
जब से बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सरकार आई है, तब से भारत को लेकर उनका रवैया थोड़ा तल्ख रहा है. वहीं, पाकिस्तान के साथ भी बांग्लादेश की नजदीकियां बढ़ने लगी हैं. ऐसे में भारत ने भी द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक रूप से परिभाषित करना शुरू कर दिया है, जिसकी झलक बजट में देखने को मिली है. भारत कपड़ा बाजार को आकर्षक बनाने की तैयारी कर रहा है. बजट से तो बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को झटका लगेगा ही, साथ ही ईयू के साथ हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी उसको करारा झटका देगा.
FTA भी बांग्लादेश के लिए बड़ा झटका
यूरोपियन यूनियन के 263 अरब डॉलर के कपड़ा बाजार में चीन के बाद बांग्लादेश की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. वह 21 से 22 प्रतिशत बाजार पर कब्जा जमाए हुए है. उसको यहां ड्यूटी फ्री एक्सेस है, जिसकी वजह से उसका कारोबर इतना बड़ा है. वहीं, भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 5 से 6 प्रतिशत ही है यानी वह यहां सिर्फ 8 अरब डॉलर के ही कपड़े बेच पाता है क्योंकि उस पर 9 से 12 प्रतिशत टैक्स लगता है. हालांकि, एफटीए के बाद टैक्स जीरो हो जाएगा, जिससे यहां भारत का कपड़ा कारोबार बढ़ेगा और इससे बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को झटका लगना तय है.