धार भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे मुस्लिम पक्ष, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती


Dhar Bhojshala Plea In Suprme Court: मध्य प्रदेश के धार भोजशाला मामले में आए मध्य प्रदेश के फैसले के खिलाफ अब मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने धार भोजशाला पर फैसले सुनाते हुए इसे देवी सरस्वती यानी वाग्देवी का मंदिर बताया था. इसके साथ ही, मुस्लिम समुदाय का जुमे की नमाज को भी रद्द करने का फैसला सुनाया था.

जुमे की नमाज से पहले बढ़ी सुरक्षा

भोजशाला परिसर को लेकर धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के बाद पड़ने वाले पहले शुक्रवार से पहले प्रशासन ने एहतियात के तौर पर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में 1,500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की है. निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

भोज उत्सव समिति ने हिंदू समुदाय से शुक्रवार को 11वीं शताब्दी के इस परिसर में सामूहिक ‘अखंड पूजा’ के लिए एकत्र होने का आह्वान किया है. समिति का दावा है कि पिछले 721 वर्षों में यह पहली बार होगा जब इस तरह का आयोजन किया जा रहा है. प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अदालत के आदेशों का पालन करने की अपील की है.

15 मई को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर माना और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी. इस फैसले से पहले हिंदू समुदाय को केवल मंगलवार को पूजा की अनुमति थी, जबकि मुस्लिम समुदाय लंबे समय से शुक्रवार को यहां नमाज अदा करता रहा है. दोनों समुदाय इस स्थल पर अपना दावा करते रहे हैं.

अदालत के निर्देश पर बढ़ी निगरानी 

धार के पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा के अनुसार, नौ स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें वाहनों की जांच, मोबाइल गश्त, सीसीटीवी निगरानी और ड्रोन से नजर रखना शामिल है.

फैसले के बाद हिंदू संगठनों ने मंगलवार को परिसर में पूजा-अर्चना की और ‘विजय उत्सव’ मनाया. इसके बाद कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में शांति समिति की बैठक भी आयोजित की गई.

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अदालत के निर्देशों को पूरी तरह लागू किया जाएगा और किसी भी नई धार्मिक गतिविधि या परंपरा की अनुमति नहीं दी जाएगी, जो पहले से स्वीकृत नहीं थी. साथ ही लोगों से अफवाहों और भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट से दूर रहने की अपील की गई है.

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