नेपाल ने 100 रुपये के नोट पर छाप दिए भारत के 3 इलाके, बढ़ा तनाव; एक्सपर्ट बोले- इसके पीछे चीन की…


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नेपाल की ओर से 100 रुपये के नए नोट में भारत के तीन इलाकों को दर्शाने के बाद मामला तनावपूर्ण हो गया है. नेपाल ने अपने 100 रुपये के नए नोट में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपना क्षेत्र बनाकर दिखाया गया है, जो हमेशा से भारत के उत्तराखंड राज्य का भाग हैं. नेपाल की ओर से इस कदम को उठाए जाने के बाद भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है. भारत ने नेपाल के इस कदम को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करार दिया है. वहीं, इस मामले में भारत और नेपाल के पड़ोसी देश चीन की भूमिका भी बताई जा रही है.

विदेश मामलों के एक्सपर्ट संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच संबंधों को तनावपूर्ण बनाने में चीन की भी भूमिका रही है. उन्होंने कहा कि नेपाल के कई नेता अपनी सियासी रोटी सेकने के लिए भारत को लेकर मुद्दे उठाते रहते हैं. केपी शर्मा ओली जैसे नेपाल के कई अन्य नेता, जो चीन के काफी नजदीकी के लिए जाने जाते हैं, चीन उन नेताओं के माध्यम से भी भारत और नेपाल के बीच विवाद के विषयों को खड़ा करने की साजिशें रचता है.

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स भी सामने आईं हैं कि नेपाल ने अपने इन नए नोटों को चीन में छपवाए हैं, जिससे भारत और नेपाल के संबंधों में तनावपूर्ण विवादों को खड़ा करने की कुप्रवृति भी सामने आ रही है.

भारत अपनी संप्रभुता पर कोई हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा: एक्सपर्ट

संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि जहां तक भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की बात है, अगर इस पर कोई सवाल खड़ा करेगा या इसमें कोई दखल डालने की कोशिश करेगा तो यह नया भारत इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा.

उन्होंने कहा कि भारत ने नेपाल की सरकार को यह स्पष्ट रूप से बता भी दिया है कि नेपाल को ऐसे किसी भी कदम और प्रवृति से बचना चाहिए, जिससे अनावश्यक रूप से भारत और नेपाल के संबंधों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो.

भारत-नेपाल के बीच विवाद की शुरुआत कैसे हुई? 

भारत और नेपाल के बीच इस विवाद की शुरुआत साल 2020 में हुई, जब नेपाल की केपी ओली सरकार ने एक नया राजनीतिक नक्शा जारी करते हुए दावा किया था कि महाकाली नदी के उद्गम क्षेत्र के कारण लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा उसके हिस्सा हैं. यहां तक कि नेपाल की संसद ने भी उस नक्शे को मंजूरी दे दी थी. भारत ने नेपाल के इस कदम का कड़ा विरोध जताते हुए कहा था कि यह ऐतिहासिक तथ्यों और प्रशासनिक हकीकत से बिल्कुल मेल नहीं खाता. अब करेंसी नोट पर वही नक्शा इस्तेमाल किए जाने से मामला फिर गर्म हो गया है.

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