ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान मंगलवार (23 जून, 2026) को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं. उनके इस यात्रा का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को आगे बढ़ाना है. ईरान के राष्ट्रपति बनने के बाद पेजेशकियान की यह दूसरी पाकिस्तान यात्रा है, जबकि अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद ये उनकी पहली यात्रा है.
हाई लेवल डेलीगेशन के साथ इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान पाकिस्तान के अपने समकक्ष राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री इशाक डार, सीनेट चेयरमैन और पाकिस्तानी नेशनल असेंबली के स्पीकर के साथ मुलाकात करेंगे.
इस्लामाबाद जाने से पहले क्या बोले पेजेशकियान?
ईरानी सरकारी न्यूज चैनल प्रेस टीवी के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति स्पेशल विमान ‘मिनाब 168’ से इस्लामाबाद पहुंचे. इस विमान का नाम उन 168 छात्रों की याद में रखा गया है, जो ईरान पर पूर्व में अमेरिकी हमलों में मारे गए थे.
इस्लामाबाद रवाना होने से पहले पेजेशकियान ने प्रेस टीवी से बातचीत में कहा कि उनकी यात्रा का मकसद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समझौता ज्ञापन की पूरी कार्रवाई को सुनिश्चित करना है. यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा.
समझौते की प्रतिबद्धता के साथ पालन करने पर जोर
इस्लामाबाद में अपनी निर्धारित बैठकों से पहले ईरानी राष्ट्रपति ने हाल ही में हुए शांति समझौते के सख्ती से पालन करने की जरूरत पर जोर दिया है. उन्होंने X प्लेटफॉर्म पर शेयर किए अपने एक पोस्ट में कहा, ‘बातचीत की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि जो दायित्व तय किए गए हैं, उन्हें पूरी प्रतिबद्धता और सटीकता के साथ पालन किया जाए.’
The effectiveness of the talks depends on full commitment to the agreed obligations and their precise implementation.Progress on this path will be measured by practical adherence to accepted responsibilities.Statements outside the agreed text do not help advance the negotiations.
— Masoud Pezeshkian (@drpezeshkian) June 23, 2026
उन्होंने समझौते के दौरान जिन शर्तों पर सहमति बन चुकी है, उनसे पीछे हटने को लेकर चेतावनी देते हुए कहा, ‘इस दिशा में प्रगति का आकलन स्वीकार की गई जिम्मेदारियों के व्यावहारिक रूप से पालन के आधार पर किया जाएगा. समझौते से इतर दिए गए बयान बातचीत को आगे बढ़ाने में किसी भी तरह से सहायक नहीं हैं.’
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