ईरान के साथ शांति समझौते के पहले दौर के बातचीत के बाद अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. ट्रंप प्रशासन ने पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से ईरान के तेल ब्रिकी पर लगाए गए बैन को हटा लिया है. अमेरिका के इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति पर आए संकट में कमी आएगी, साथ ही वैश्विक बाजार में ऊर्जा की बढ़ी कीमतों पर भी असर पड़ेगा और दाम कम होंगे.
हालांकि, अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंधों को ईरान पर से 60 दिनों की अस्थायी छूट देते हुए उसके तेल, पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के प्रोडक्शन, ट्रांसिट और एक्सपोर्ट को मंजूरी दी है. ऐसे में पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान ऊर्जा संकट से जूझ रहे भारत को भी बड़ी राहत मिलने की संभावना है. हालांकि, यह भी देखना होगा कि क्या अमेरिका की तरफ से दी गई ये 60 दिनों की छूट भारत के लिए कितना फायदेमंद साबित होती है?
स्विट्जरलैंड की मीटिंग के बाद आया गुड न्यूज
दरअसल, अमेरिकी प्रशासन की तरफ से उठाया गया यह कदम हाल ही में स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत के सकारात्मकता का नतीजा है, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ लंबे समय तक चली बैठकें एक व्यापक शांति समझौते की नींव रखने में सफल रही है. इसके बाद, अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से घोषणा करते हुए कहा है कि ईरानी तेल पर से प्रतिबंधों की छूट 21 अगस्त, 2026 तक वैध रहेगी.
प्रतिबंधों को हटाने पर क्या बोले अमेरिकी वित्त मंत्री?
Under President @realDonaldTrump and @VP, we continue to make the world safer and more prosperous.
In line with the ongoing productive talks in Switzerland, Iran has committed to free and open transit in the Strait of Hormuz and to permit International Atomic Energy Agency…
— Treasury Secretary Scott Bessent (@SecScottBessent) June 22, 2026
इस संबंध में अमेरिका का वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. उन्होंने लिखा, ‘राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हम दुनिया को ज्यादा सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं. स्विट्जरलैंड में चल रही सार्थक बातचीत के बाद होर्मुज स्ट्रेट में निर्बाध और सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करना और IAEA के इंस्पेक्टरों को अपने देश में प्रवेश देने करने की प्रतिबद्धता जताई है.
भारत को मिलेगा फायदा या स्थिति रहेगी बरकरार?
हालांकि, अमेरिका की तरफ से ईरान पर से हटाए गए वित्तीय प्रतिबंध भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा आयात के लिए कितने फायदेमंद होंगे, ये तो आने वाले समय ही बताएगा, लेकिन यह भारत के लिए त्वरित राहत जरूर साबित हो सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल पर दबाव बढ़ेगा और भारत में ईंधन और गैस के दामों की कमी आ सकती है.
केप्लर के मॉडलिंग और रिफाइनिंग के प्रमुख विश्लेषक सुमित रितोलिया के मुताबिक, भले ही अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में चल रही है, इसके बावजूद ईरान के साथ किसी बड़े कच्चे तेल की डील होती की उम्मीद नहीं है. क्योंकि जब तक अमेरिकी प्रतिबंध नीति में उतार-चढ़ाव जारी रहेंगे, तब तक भारत ईरानी तेल के आयात पर कोई दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की तरफ कदम नहीं बढ़ाएगा.
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