पॉक्सो मामले में नया मोड़, केंद्रीय मंत्री के बेटे बंडी भागीरथ पर सबूत मिटाने के आरोप, क्या बढ़ेगी आरोपी की परेशानी?


केंद्रीय राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंडी भागीरथ से जुड़े POCSO मामले की जांच के दौरान एक अहम मोड़ सामने आया है. पुलिस ने अब उन पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 238 के तहत आरोप लगाया है, जो कथित तौर पर अहम सबूतों को नष्ट करने से जुड़ी धारा है. यह फैसला तब लिया गया, जब जांचकर्ताओं को पता चला कि आरोपी ने आत्मसमर्पण करने के बाद पुलिस को एक खाली मोबाइल फोन सौंपा था. इससे उस समय के दौरान उसके कामों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जब वह फरार था.

बिना सिमकार्ड के पुलिस को आरोपी भागीरथ ने सौंपा फोन

जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भागीरथ आत्मसमर्पण करने से पहले कई दिनों तक गिरफ्तारी से बचता रहा था. अधिकारियों का अब मानना है कि वह आत्मसमर्पण पछतावे का काम नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति थी. फरार रहने के दौरान आरोपी पर जानबूझकर ऐसे सबूत नष्ट करने का शक है, जो इस मामले के लिए बहुत अहम हो सकते थे.

आत्मसमर्पण के बाद जब पुलिस ने उसका मोबाइल फोन मांगा, तो भागीरथ ने एक ऐसा हैंडसेट दिया, जिसमें कोई सिमकार्ड ही नहीं था. सिमकार्ड न होने के बारे में पूछे जाने पर उसने लापरवाही भरा जवाब दिया और कहा कि उसने उसे कहीं रख दिया था और बस भूल गया कि कहां रखा है. 

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भागीरथ की स्थिति को कमजोर कर सकता है नया आरोप?

जांचकर्ताओं को पॉक्सो अधिनियम के तहत आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह सफाई बहुत संदिग्ध लगी. जानबूझकर खाली फोन देना और साथ ही सिमकार्ड न दे पाना या देने से मना करना, यह साफ दिखाता है कि डिजिटल सबूतों को मिटाने की जानबूझकर कोशिश की गई थी. नतीजतन, जांच टीम ने औपचारिक रूप से मौजूदा मामले में धारा 238 जोड़ दी है, जो विशेष रूप से दस्तावेजी या इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को नष्ट करने से संबंधित है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह नया आरोप मुकदमे के दौरान भागीरथ की स्थिति को काफी कमजोर कर सकता है, क्योंकि यह सहयोग के बजाय सबूत छिपाने के रवैये की ओर इशारा करता है. 

पुलिस ने सबूत बरामद करने के लिए जांच की तेज

इस बीच, पुलिस ने किसी भी बरामद होने लायक डेटा को हासिल करने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं, हालांकि सिमकार्ड का न होना अभी भी एक बड़ी बाधा बना हुआ है. इस घटनाक्रम पर राजनीतिक गलियारों से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं और विपक्षी दल पूरी घटनाक्रम की अदालत की निगरानी में जांच की मांग कर रहे हैं.

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या खाली फोन के फॉरेंसिक विश्लेषण से कोई सुराग मिलता है या क्या लापता सिमकार्ड कभी सामने आता है. फिलहाल, यह मामला मूल आरोपों से आगे बढ़कर न्याय में जानबूझकर बाधा डालने के नए और परेशान करने वाले आयाम में पहुंच गया है.

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