बांग्लादेश के चुनाव नतीजों पर आया निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन का पहला रिएक्शन, तारिक रहमान को दिए ये सुझाव


बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में जनता ने आखिरकार पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी को धमाकेदार जीत से नवाजा है. खालिदा के बेटे तारिक रहमान कल यानी शनिवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. यह पहला ऐसा चुनाव था, जो अवामी लीग के बिना हुआ. चुनाव के नतीजे आने के बाद बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन का रिएक्शन आया है. उन्होंने जमात की हार पर कहा कि अच्छा हुआ कि इस्लामिस्ट जिहादी टेररिस्ट ग्रुप इस चुनाव में हार गया. 

तसलीमा नसरीन ने लिखा- मैं इसलिए खुश नहीं हूं कि BNP जीती…

तसलीमा नसरीन ने लिखा, ‘इस चुनाव में मैं इसलिए खुश नहीं हूं, कि बीएनपी जीती, बल्कि इसलिए खुश हूं कि इस्लामिस्ट जिहादी आतंकवादी संगठन हार गया. पिछले डेढ़ साल से उन्होंने एक तरह का दबदबा देश की राजनीति में दिखाया, लाखों समर्थक के हुजूम के साथ रैलियां की, जब चाहा रात दिन हिंसा की. जिसे चाहा उसे मारा, टॉर्चर किया, हिंदुओं के घरों में आग लगाई, हिंदुओं को पीट-पीटकर और जलाकर मार डाला. वोट के लिए एक भी महिला को बतौर उम्मीदवार चुनाव में नहीं उतारा.’

उन्होंने कहा, ‘महिलाओं से इतनी नफरत करने वाली पार्टी ने वर्किंग वुमन्स को प्रोस्टिट्यूट कहकर बेइज्जती की. महिलाओं की लीडरशिप के खिलाफ बात की. महिलाओं को बुर्के और नकाब के अंधेरे में धकेला. महिलाओं को मर्दों की गुलाम और सेक्स स्लेव समझा. महिलाओं के खिलाफ शरिया कानून लागू करने का सपना देखा. जनता ने जमात-ए-इस्लामी को सत्ता में नहीं आने दिया. अभी के लिए यह अच्छी खबर है.’ 

तसलीमा ने तारिक रहमान को दिए ये सुझाव

इसके अलावा उन्होंने देश में बदलाव करने को लेकर कुछ सुझाव बीएनपी पार्टी को दिए हैं. उन्होंने अपील कर लिखा कि एक जुलाई का चार्टर रद्द कर देना चाहिए. संविधान में उदारवाद को फिर से बढ़ावा देना चाहिए. सरकारी धर्म को हटाना होगा. धर्म पर आधारित पारिवारिक कानून खत्म करना होगा. महिलाओं को समानता देने के लिए एक यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना चाहिए. इसके अलावा उन्होंने कहा कि बोलने की आजादी, मानवाधिकार, अल्पसंख्यक धर्म (हिंदू, बौद्ध, ईसाई, मूलनिवासी) की सुरक्षा और महिलाओं की सुरक्षा पक्की करना होगी. 

उन्होंने कहा कि मदरसा आधारित शिक्षा को खत्म करना होगा. एक सेक्युलर और साइंस पर आधारित शिक्षा को सिस्टम को मजबूत करना होगा. सभी के लिए यूनिवर्सल शिक्षा और हेल्थकेयर को मजबूत करना होगा. 

तसलीमा ने कहा, ‘लोकतंत्र का सम्मान करते हुए, अवामी लीग पर लगे बैन को हटाना होगा. ऐसे इंतजाम करने होंगे कि उसके नेता निर्वासन से लौट सकें. राजनीति में शामिल हो सकें. जिहादी समर्थित जमात-ए-इस्लामी को मुख्य विपक्षी दल बनाए रखना सुरक्षित नहीं है.’ 

उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ-साथ अमीर और गरीब के अंतर को कम करना होगा. पारिवारिक और धार्मिक राजनीति को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. साथ ही शेख हसीना की सरकार के समय ब्लॉगर्स को मार दिया गया था, जिससे आजाद ख्याल वाले लोग, जिन्होंने डर कर अपनी जान बचाने के लिए विदेश में शरण ली. उनके लिए ऐसे इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि वे घर लौट सकें. सुरक्षित रूप से काम कर सकें. 

लिबरेशन वॉर की मूर्तियों को फिर से बनाया जाना चाहिए: नसरीन

तसलीमा नसरीन ने कहा कि बोलने की आजादी और प्रेस की आजादी का उल्लंघन नहीं होना चाहिए. सभी किताबें, थिएटर प्रोडक्शन और फिल्में जो बैन हैं, उन्हें जारी किया जाना चाहिए. लिबरेशन वॉर की यादगार मूर्तियों को फिर से बनाया जाना चाहिए. धानमंडी 32 के घरों को भी फिर से बनाया जाना चाहिए. किसी भी सरकारी या निजी संस्थाओं में महिलाओं के लिए हिजाब, बुर्का वगैरह जरूरी नहीं बनाना चाहिए. सुरक्षा कारणों से बुर्का और नकाब पर बैन लगाया जाना चाहिए.

इसके अलावा उन्होंने कहा कि जिहादी आतंकवादियों को फिर से गिरफ्तार किया जाना चाहिए.  भारत के साथ दुश्मनी वाले रिश्ते खत्म होने चाहिए. चिन्मय कृष्ण दास को रिहा किया जाना चाहिए. आवामी लीग के सभी सदस्यों और समर्थकों के साथ साथ कलाकारों लेखकों और पत्रकारों, जिनको भी जेल में डाला गया है, उन्हें रिहा किया जाना चाहिए. 





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