भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत हुई पूरी, समझौते के लिए दोनों पक्षों ने जताई प्रतिबद्धता


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  • अमेरिका ने 60 देशों पर व्यापारिक कार्रवाई की धमकी दी।

भारत और अमेरिका ने गुरुवार (4 जून, 2026) को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हुई बातचीत के खत्म होने के बाद व्यापार समझौते तक पहुंचने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया. इस संबंध में भारत सरकार की तरफ से एक आधिकारिक बयान जारी कर जानकारी साझा की गई है, जिसके तहत जून महीने की शुरुआत सोमवार (1 जून, 2026) से गुरुवार (4 जून, 2026) तक अमेरिकी मुख्य वार्ताकार की भारत यात्रा के दौरान चार दिनों तक चली बातचीत के बाद दोनों देश अंतरिम व्यापार समझौते के और ज्यादा करीब पहुंच गए हैं.

अमेरिकी पक्ष के साथ वार्ता पर भारत सरकार ने क्या कहा?

भारत सरकार की ओर से बयान में कहा गया, ‘अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) का एक प्रतिनिधिमंडल व्यापार समझौते पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए 1 से 4 जून, 2026 तक भारत के दौरे पर आया था, जिसका नेतृत्व मुख्य वार्ताकार कर रहे थे. बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने सामानों के व्यापार, नॉन-टैरिफ मेजर्स, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, इकोनॉमिक सिक्योरिटी अलाइनमेंट के साथ-साथ अन्य पारस्परिक हितों के क्षेत्रों पर रचनात्मक और सकारात्मक चर्चा की.

सरकार ने कहा, ‘इन चर्चाओं में सहयोग और व्यावहारिकता की भावना दिखाई दी और दोनों पक्षों ने एक ऐसे पारस्परिक रूप से फायदा पहुंचाने वाले समझौते को अंतिम रूप देने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा.’

अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों को दी कार्रवाई की धमकी 

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने भारत सहित दुनिया भर 60 देशों के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई (ट्रेड एक्शन) की चेतावनी दी है. अमेरिका का आरोप है कि इन देशों ने फोर्स्ड लेबर से बने सामानों के आयात पर बैन लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में नाकामी दिखाई है.

इस संबंध में USTR ने मंगलवार (2 जून, 2026) को एक आधिकारिक बयान जारी किया था. जिसमें USTR ने कहा कि यूएस ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत यह नतीजा निकलता है कि इन 60 अर्थव्यवस्थाओं (देशों) की नीतियां, कार्यप्रणालियां और तरीके गलत हैं और अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं या उस पर प्रतिबंध लगाते हैं, इसलिए अमेरिकी व्यापार कानून के तहत इनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.

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