इस साल प्रचंड गर्मी पड़ रही है. देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है. इस बार की गर्मी गंभीर चिंता का विषय क्यों है, इसे लेकर यूसी बर्कले के रिसर्चर्स पीयूष नारंग और अशोक गाडगिल ने स्टडी की है. रिसर्चर्स की टीम ने देश के 10 शहरों पर किए गए पिछले अध्ययनों के आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें देशव्यापी स्तर पर लागू करते हुए सभी जिलों की स्टडी की है.
स्टडी में अनुमान लगाया कि देशभर में सिर्फ एक दिन की भीषण गर्मी से लगभग 3,400 मौतों की आशंका है और 5 दिनों की लू से लगभग 30,000 तक लोगों मौत होने का अनुमान जताया गया है. हालांकि भारत में भीषण गर्मी कोई नई बात नहीं है और हाल के सालों में लू की अवधि और तीव्रता बढ़ती जा रही है. 2024 में, राजस्थान के कुछ हिस्सों में तापमान चौंका देने वाले 50.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि दिल्ली जैसे शहरों में पिछले कई वर्षों की सबसे गर्म रातें दर्ज की गईं.
किन राज्यों के लिए चेतावनी
इस साल 2026 में उत्तरी, मध्य और पश्चिमी राज्यों में भी इसी तरह की चरम स्थितियां देखने को मिल रही हैं और दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में भीषण गर्मी की चेतावनी जारी की गई है. इस साल दिन में गर्मी के अलावा बड़ी समस्या गर्म रातों को लेकर भी है. इस कारण रात में मिलने वाली थोड़ी राहत भी खत्म होती जा रही है. शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट के बने घर सूरज डूबने के बाद भी गर्म रहते हैं और ज्यादा तपते हैं. इनके चलते बाहर से आकर मेट्रो सिटीज में नौकरी करने वाले लोग और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि वे बढ़ते तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील और असुरक्षित होते हैं.
गर्मी से होने वाली मौतें नहीं हो पाती दर्ज
इस स्टडी से सामने आए आंकड़े और भी चिंताजनक हो जाते हैं क्योंकि इन मौतों के बारे में हमें बहुत कम जानकारी मिलती है. हीटस्ट्रोक से होने वाली मौतों के ऑफिशियल नंबर अक्सर कम होते हैं. गर्मी से संबंधित कई मौतों को इसमें दर्ज नहीं किया जाता है. खराब मौसम के चलते होने वाली मौतों को अक्सर दिल का दौरा, सांस लेने में तकलीफ या अन्य कारणों से होने वाली मौतें मान लिया जाता है. गर्मी से होने वाली मृत्यु दर पर स्पष्ट और विस्तृत आंकड़ों की कमी के कारण अधिकारियों और आमजन के लिए इस समस्या की गंभीरता को पूरी तरह से समझ पाना लंबे समय से मुश्किल रहा है.
स्टडी के मुताबिक मौतों का असल नंबर अनुमान से ज्यादा भी हो सकता है. स्टडी के मुताबिक यूपी में 5 दिनों की लू में 8,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे शहरों के जिलों में एक ही दिन में 250 से अधिक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं.
PTI के इनपुट के साथ
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