चीन न्यूक्लियर हथियारों में बेतहाशा वृद्धि कर रहा है. हाल ही में हथियारों का जखीरा तेजी से बढ़ा है. इस मामले में यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा जखीरा बताया जा रहा है. चीन के पास 2026 तक 600 वॉरहेड होंगे. यह रूस और अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा है. रूस के पास जहां 5,400 और अमेरिका के पास 5,100-5,200 वॉर हेड हैं. मतलब साफ है कि चीन का लक्ष्य 2030 तक 1 हजार से ज्यादा वॉरहेड तक पहुंचना है. ये खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है. चीन सीक्रेट जगह पर न्यूक्लियर हथियारों में बढ़ोतरी कर रहा है. यह अरुणाचल प्रदेश से लगभग 800 Km दूर है.
NYT की रिपोर्ट के मुताबिक, इन इमेज के जरिए बताया गया है कि इसमें सिचुआन की घाटियों में दो खास जगह, जिटोंग और पिंगटोंग के बारे में बताया गया है. इसमें दावा किया गया है कि हजारों की संख्या में वैज्ञानिक, इंजीनियर और मजदूर ने पहाड़ के अंदरूनी इलाकों में एक इनलैंड न्यूक्लियर एम्पायर खड़ा किया है.
जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट रेनी बाबियार्ज ने इन तस्वीरों का एनालइज किया है. इसमें बताया गया है कि चीन में अलग-अलग न्यूक्लियर साइट्स पर 2019 के बाद डेवलपमेंट तेज हुआ है. इन साइट्स पर जमीन में जो बदलाव नजर आ रहे हैं, वो चीन के सुपरपावर बनने के लक्ष्य से मेल खाते हैं. न्यूक्लियर हथियार इसका जरूरी हिस्सा है.
इस इलाके में क्या न्यूक्लियर टेस्ट की सुविधा है?
रिपोर्ट्स की मानें तो जिटोंग में इंजीनियरों ने वैली सेटिंग में नए बंकर और रैम्पर्ट बनाए हैं. एक बड़े कॉम्पलेक्स में बड़ी पाइपिंग है. इससे पता चलता है कि यह बहुत ही खतरनाक मटीरियल को संभालता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो इन बंकरो और किलेबंद जगह का इस्तेमाल हाई एक्सप्लोसिव की टेस्टिंग के लिए किया जाता है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपके पास हाई एक्सप्लोसिव की एक लेयर होती है. शॉक वेव उसी वक्त सेंटर में घुस जाती है. इसे दुरुस्त करने के लिए ब्लास्ट टेस्ट की जरूरत होती है.
2030 तक चीन की न्यूक्लियर क्षमता दोगुनी हो जाएगी
रिपोर्ट्स के मुताबिक न्यूक्लियर स्टॉक 2030 तक लगभग दो गुना हो जाएगा. पेंटागन की मानें तो 2024 के आखिर तक चीन का न्यूक्लियर स्टॉक 600 से ज्यादा वॉरहेड्स का था. 2030 तक इसके 1 हजार तक पहुंचने का अनुमान है. हालांकि, ये रूस और अमेरिका से बेहद ही कम है. लेकिन इसमें इजाफा चिंता जरूर बढ़ाता है.
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में किसी भी एग्रीमेंट में चीन को शामिल करना होगा. बीजिंग ने हालांकि किसी तरह की दिलचस्पी नहीं दिखाई है. हालांकि, इमेज के जरिए कम जानकारी मिलती है. फिलहाल चीन के पास कितने वॉरहेड है, इसकी जानकारी नहीं है. प्लांट का विस्तार होता इमेज में जरूर नजर आ रहा है.