9 साल की उम्र में तेहरान छोड़ा, 31 साल में दुनिया! शाही महल से लंदन के होटल तक, ऐसी है ईरान की प्रिंसेस लैला की दुख भरी कहानी


ईरान में आर्थिक हालात ठीक नहीं है. वहां सड़कों पर नागरिक एक बेहतर भविष्य और चुनी हुई सरकार की मांग कर रहे हैं. खामेनेई सरकार की नीतियों के विरोध में सत्ता से उन्हें बेदखल करने को लेकर इस मीडिल ईस्ट देश में प्रदर्शन चल रहे हैं. ऐसे में हम आपको उस किस्से के बारे में बता रहे हैं, जिसने सभी को हैरानी में डाल दिया था. यह किस्सा है, ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी की सबसे छोटी बेटी प्रिंसेस लैला की दुखद मौत की. 

 शक्तिशाली शाही परिवार में जन्मीं प्रिंसेस लैला से जुड़ी जानकारी

प्रिंसेस लैला पहलवी का जन्म बीसवीं सदी के सबसे शक्तिशाली शाही परिवारों में हुआ था. लेकिन वह ईरान में कम ही रहीं, उन्होंने अपनी पहचान खुद बनाई. ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी और महारानी फराह पहलवी की सबसे छोटी बेटी लैला की जिंदगी तेहरान के एक महल से निर्वासन झेलने और होटल के कमरों में बीता. उनकी कहानी ईरान के सबसे शक्तिशाली राजवंश के पतन की कहानी है.  

लैला का जन्म 27 मार्च 1970 को तेहरान में हुआ. वह शाह और महारानी फराह की सबसे छोटी बेटी थीं. शाह के दौरान ईरान मॉर्डनाइजेशन के रास्ते पर चलने लगा था. लैला ऐसे माहौल में पली बढ़ीं, जहां परंपरा और पश्चिमी प्रभाव का असर था. वह एक इंट्रोवर्ट बच्चों की तरह थीं. बेहद ही संवेदनशील थीं. वह अपने माता- पिता और भाई- बहनों से बेहद लगाव भी रखा करती थीं. 

एक क्रांति ने लैला की जिंदगी में सबकुछ बदल दिया
जनवरी 1979 में शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए. शाह की मौत के नारे सड़कों से लेकर शाही महलों में गूंजने लगे. ईरान क्रांति ने न केवल शाह के शासन को खत्म किया, बल्कि परिवार से नागरिकता, सुरक्षा और घर तक छीन लिया गया. शाह का परिवार मिस्र, मोरक्कों, बहामास, मैक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका और पनामा में रहा. हर दिन परिवार के खिलाफ भयानक राजनीतिक धमकियों का दबाव रहने लगा. उन्हें संरक्षण देने वाले देशों पर भारी दबाव भी रहा.

निर्वासन शाह परिवार के लिए दर्दनाक किस्से की तरह रहा

निर्वासन का असर शाह के परिवार पर बेहद ही दर्दनाक किस्से की तरह रहा. 27 जुलाई 1980 को शाह की मौत काहिरा में हो गई. यानी ईरान छोड़ने के महज दो साल बाद ही. इसके बाद महारानी ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और अमेरिका में बस गए. प्रिंसेस लैला ने 1998 में राय कंट्री डे स्कूल से ग्रेजुएशन किया. न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई की. इसके बाद वह अमेरिका और पेरिस में रहीं. जहां उन्होंने फारसी, अंग्रेजी और फ्रेंच समेत कई भाषाएं सीखीं. उन्होंने अपना जीवन गुमनामी में ही रखा. 

लैला को कई मानसिक बीमारियों ने घेरा और…

लैला को उम्र के साथ कई बीमारियों का भी सामना करना पड़ा. उन्होंने क्रोनिक थकान सिंड्रोम, डिप्रेशन और गंभीर एनोरेक्सिया रहा. उन्होंने अमेरिका और यूके में इन बीमारियों का इलाज भी किया. उनकी मां उनका बेहद ही ख्याल रखा करती थीं. लैला ने सार्वजनिक जीवन से हमेशा दूरी ही बनाए रखी. वह अपने बड़े भाई रजा पहलवी से बिल्कुल इतर थीं.  निर्वासन के समय रजा पहलवी सार्वजनिक जीवन में रहे, लेकिन लैला ने अपना जीवन बेहद ही निजी रखा. 

होटल में मिली थीं मृत, आत्महत्या की हुई थी पुष्टी 

एक दिन 10 जून 2001 को प्रिंसेस लैला पहलवी लंदन के लियोनार्ड होटल के एक कमरे में मृत मिलीं. वह 31 साल की थीं. उनकी मौत प्रिस्क्रिप्शन बार्बिट्यूरेट्स के ओवरडोज से हुई थी. उनके शरीर में कोकीन मिली थी. इस को एक सुसाइड माना गया था. उन्हें पेरिस में दफनाया गया. निर्वासन उनके जीवन के लिए भयानक था. 2011 में भाई प्रिंस अली रजा की भी मौत हो गई. इन्होंने भी आत्महत्या की थी. निर्वासन के दर्द में हुई पारिवारिक बर्बादी को लेकर ईरान की महारानी फराह ने कई दुख भरी यादें और संस्मरण लिखे हैं. 



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