Dhurandar: ‘जो दिखाया वो सच था, पर अफसोस कि मुझे चापलूस…’, फिल्म धुरंधर में अपने किरदार से खुश नहीं है ये पाकिस्तानी नेता


बॉलीवुड फिल्म धुरंधर को लेकर पाकिस्तान में नई बहस छिड़ गई है. फिल्म में अभिनेता राकेश बेदी ने ‘जमील जमाली’ नाम का किरदार निभाया है. अब पाकिस्तान के नेता नबील गबोल ने दावा किया है कि यह किरदार दरअसल उन्हीं पर आधारित है, हालांकि फिल्म में नाम बदला गया है.

नबील गबोल ने पाकिस्तानी यूट्यूबर नादिर अली को दिए इंटरव्यू में कहा कि फिल्म सुपरहिट रही, लेकिन उनके किरदार को सही तरीके से पेश नहीं किया गया. उनका कहना है कि फिल्म में ‘जमील जमाली’ के नाम के नीचे MNA 2007 लिखा गया है, और 2007 में वे ही उस क्षेत्र से एमएनए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म निर्माताओं ने मानहानि के डर से उनका असली नाम नहीं लिया. उनके अनुसार, फिल्म में कई अन्य पात्रों के असली नाम इस्तेमाल किए गए क्योंकि वे अब जीवित नहीं हैं, लेकिन उनका नाम बदल दिया गया.

किरदार की प्रस्तुति पर आपत्ति

गबोल ने कहा कि फिल्म में उनके किरदार को कमजोर और चापलूस दिखाया गया, जबकि 2007 से 2009 के दौरान उनकी भूमिका मजबूत और प्रभावशाली रही थी. उन्होंने कहा कि वे उस समय “दबंग” भूमिका में थे और कई अहम फैसले लिए थे. उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म में भाषा और सांस्कृतिक प्रस्तुति गलत दिखाई गई. उनके अनुसार, लियारी के लोग बलोच हैं और वहां पंजाबी भाषा नहीं बोली जाती, जबकि फिल्म में ऐसा दिखाया गया.

 

 

लियारी की छवि पर सवाल

नबील गबोल ने कहा कि फिल्म में लियारी को आतंकवाद और गैंगस्टर गतिविधियों का गढ़ दिखाया गया, जो सही नहीं है. उन्होंने दावा किया कि कराची के अन्य इलाकों की तुलना में लियारी के चार थानों में अपराध दर कम है. उन्होंने यह भी कहा कि लियारी के लोग खेल प्रेमी और मिलनसार हैं, और वहां की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है.

भारत–पाक संदर्भ में बयान

इंटरव्यू के दौरान गबोल ने फिल्म को भारत–पाकिस्तान तनाव से जोड़ते हुए कहा कि यह फिल्म पाकिस्तान को निशाना बनाकर बनाई गई है. उन्होंने भारतीय मीडिया और फिल्म उद्योग पर पाकिस्तान की छवि खराब करने का आरोप लगाया.

वर्तमान राजनीतिक स्थिति

नबील गबोल ने बताया कि वे इस समय Pakistan Peoples Party (PPP) से जुड़े हैं और लियारी क्षेत्र से फिर से सांसद चुने गए हैं. उनका कहना है कि उन्हें राजनीतिक रूप से खत्म करने की कोशिशें हुईं, लेकिन वे दोबारा जनता के समर्थन से संसद पहुंचे. कुल मिलाकर, ‘धुरंधर’ फिल्म को लेकर यह विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है. एक ओर फिल्म की व्यावसायिक सफलता की चर्चा है, तो दूसरी ओर किरदारों की प्रस्तुति और राजनीतिक संदेश को लेकर बहस तेज हो गई है.



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