Supreme Court Justice BR Gavai says Court Hearing Clips use to spread sensation | कोर्ट हियरिंग की लाइव-स्ट्रीमिंग पर जस्टिस गवई ने जताई चिंता, बोले


सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस भूषण रामाकृष्ण गवई ने कानूनी कार्यवाही को सनसनीखेज बनाने के लिए सुनवाई की संपादित क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने की आलोचना की और कहा कि न्यायपालिका को अदालतों की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए दिशानिर्देश बनाने पड़ सकते हैं.

जस्टिस गवई ने केन्या में एक कार्यक्रम में कहा कि अदालती कार्यवाही के क्लिप को बिना संदर्भ के संपादित किया जाता है और सोशल मीडिया मंच पर साझा किया जाता है. वे कोर्ट के अंदर टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के विषय पर बोल रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘मैं भारतीय अनुभव से एक और चिंता को उजागर करना चाहूंगा. अदालती सुनवाई के छोटे क्लिप अक्सर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाते हैं, कभी-कभी इस तरह से कि कार्यवाही सनसनीखेज हो जाती है. इन क्लिप को जब संदर्भ से बाहर लिया जाता है, तो इससे गलत सूचना, न्यायिक चर्चाओं की गलत व्याख्या और गलत रिपोर्टिंग हो सकती है.’

उन्होंने बताया कि यूट्यूबर्स सहित कई कंटेंट क्रिएटर ने सुनवाई के छोटे अंशों को अपने कंटेंट के रूप में पुनः अपलोड किया, जिससे बौद्धिक संपदा अधिकारों और न्यायिक रिकॉर्डिंग के स्वामित्व पर चिंताएं उत्पन्न हुईं. जस्टिस गवई ने कहा कि ऐसी चुनौतियों का प्रबंधन न्यायपालिका के लिए एक उभरता हुआ मुद्दा है और अदालतों को लाइव-स्ट्रीम की गई कार्यवाही के उपयोग पर दिशानिर्देश तय करने पड़ सकते हैं.

जस्टिस गवई ने कहा कि यद्यपि टेक्नोलॉजी की वजह से न्यायिक कार्यवाहियों तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन इसने कई नैतिक चिंताओं को भी जन्म दिया है. जस्टिस गवई ने कहा कि दुनिया भर की अदालतें कार्यकुशलता में सुधार लाने, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने और न्याय तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी को तेजी से एकीकृत कर रही हैं.

जस्टिस गवई ने कानूनी अनुसंधान में एआई के उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण जोखिमों को भी रेखांकित किया.

 

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