बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने जा रहे हैं. Bangladesh General Election 2026 को लेकर पूरे देश में राजनीतिक माहौल गर्म है. एबीपी न्यूज की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान ढाका में चुनावी हलचल, जनता की राय और राजनीतिक समीकरणों को समझने की कोशिश की गई.
बांग्लादेश की राजनीति में ब्लैक एंड व्हाइट पोस्टरों का पुराना चलन है. इस बार भी लगभग सभी प्रमुख दल काले-सफेद पोस्टरों के जरिए वोट मांग रहे हैं. ढाका की मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक दीवारें और खंभे पोस्टरों से पट दिखाई देते हैं. स्थानीय पत्रकार ज़ाहिद रहमान के मुताबिक मुकाबला बेहद कांटे का है. उनका कहना है कि मुख्य लड़ाई जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के बीच मानी जा रही है. दोनों दलों के समर्थक पूरे जोश के साथ प्रचार में जुटे हैं. चुनावी रैलियां, नुक्कड़ सभाएं और घर-घर संपर्क अभियान तेज हो चुके हैं.
जनता के लिए चुनाव किसी त्योहार से कम नहीं
ढाका के मगबाजार इलाके की ग्राउंड रिपोर्ट में यह साफ दिखा कि आम नागरिक चुनाव को उत्सव की तरह ले रहे हैं. एक चाय की दुकान पर बातचीत के दौरान कई लोगों ने कहा कि चुनाव उनके लिए ईद जैसा माहौल लेकर आता है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे चाहते हैं कि अगली सरकार भारत के साथ मजबूत और सकारात्मक रिश्ते बनाए रखे. कई लोगों ने भारत को भाई जैसा देश बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच दोस्ती और व्यापारिक संबंध और मजबूत होने चाहिए.
अवामी लीग को लेकर भी उठे सवाल
कुछ नागरिकों ने यह भी कहा कि वे अवामी लीग को भी चुनावी मैदान में देखना चाहते थे. उनके मुताबिक लोकतंत्र में सभी दलों को चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए. हालांकि मौजूदा चुनावी समीकरण में मुख्य मुकाबला BNP और जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा है.
कौन जीतेगा?
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान अलग-अलग लोगों की अलग राय देखने को मिली. कुछ नागरिकों का मानना है कि जमात-ए-इस्लामी बढ़त बना सकती है, जबकि कुछ लोग BNP की जीत की संभावना जता रहे हैं. कुल मिलाकर Bangladesh General Election 2026 को लेकर जनता में उत्साह और अनिश्चितता दोनों दिखाई दे रहे हैं. अब सबकी नजर 12 फरवरी पर है, जब यह तय होगा कि बांग्लादेश की सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी और देश की राजनीतिक दिशा क्या होगी.
अवामी लीग के मुख्यालय पर ताला
बांग्लादेश में इस बार चुनाव का माहौल पहले से काफी अलग है. राजधानी ढाका में अवामी लीग के मुख्यालय पर ताला लगा हुआ है. अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से पार्टी का दफ्तर बंद है. इस बार अवामी लीग को चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई है. एबीपी ने ढाका विश्वविद्यालय से ग्राउंड रिपोर्ट की. वहां छात्रों से बातचीत में अलग-अलग राय सामने आई. कई युवाओं ने कहा कि वे देश में शांति और मजबूत लोकतंत्र चाहते हैं. उनका कहना है कि भारत के साथ रिश्ते और बेहतर होने चाहिए. बांग्लादेश के Gen Z यानी नई पीढ़ी का बड़ा हिस्सा अभी भी तय नहीं कर पाया है कि वह जमात और बीएनपी के गठबंधन में किसका समर्थन करेगा. कुछ छात्रों ने कहा कि वे अपना फैसला सीधे बैलेट बॉक्स में देंगे.
हिंदू छात्रा ने चुनाव को लेकर दिया बयान
ढाका विश्वविद्यालय की एक हिंदू छात्रा दीप्ति ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि वह चुनाव के बाद के हालात को लेकर डर और उलझन में हैं. उनका कहना है कि अगर जमात सत्ता में आती है तो महिलाओं और अल्पसंख्यकों की स्थिति बदल सकती है. अभी भी पूजा-पाठ को लेकर थोड़ा डर रहता है, लेकिन चुनाव के बाद क्या होगा, यह साफ नहीं है. दीप्ति का परिवार लंबे समय से ढाका में रह रहा है.