Explained: तेल-गैस की किल्लत और मिडिल ईस्ट तनाव के बीच PM मोदी का विदेश दौरा क्यों, किन पांच देशों से भारत के लिए क्या लाएंगे?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई 2026 तक पांच देशों की एक अहम रणनीतिक यात्रा पर जा रहे हैं, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ-साथ चार प्रमुख यूरोपीय देश शामिल हैं. यह यात्रा एक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है. यह 5 दिवसीय यात्रा 15 मई से शुरू होकर 20 मई तक चलेगी और इस दौरान प्रधानमंत्री पांच देशों का दौरा करेंगे. अब सवाल उठता है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के माहौल में PM मोदी का दौरा क्यों हो रहा है और इसकी रणनीति क्या है?

PM मोदी UAE से दौरे की शुरुआत करेंगे…

1. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)- 15 मई: PM मोदी की यात्रा अबू धाबी से शुरू होगी. यानी पहले दिन ही  PM मोदी वहां जाएंगे. वहां वो राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मिलेंगे. ये हमारे देश के पुराने और भरोसेमंद दोस्त हैं. सबसे अहम बात है ऊर्जा सुरक्षा, मतलब तेल और गैस की जरूरत. आजकल जिस तरह की खबरें आ रही हैं, ऐसे में ये बात और ज्यादा अहम हो जाती है. इसके अलावा, UAE हमारे देश में बहुत बड़ा निवेशक भी है और वहां 45 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं, तो उनकी भलाई के बारे में भी बात होगी. UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और एक प्रमुख निवेशक है.

2. नीदरलैंड- 15 से 17 मई: UAE के बाद  PM मोदी जाएंगे नीदरलैंड. ये 2017 के बाद उनकी वहां दूसरी बार यात्रा है. यहां की खास बात ये है कि बातचीत का फोकस बिल्कुल नई तरह की तकनीकों और आइडिया पर रहेगा. मसलन, जल प्रबंधन (वो पानी को कैसे मैनेज करते हैं, क्योंकि वो इसमें दुनिया के उस्ताद हैं), सेमीकंडक्टर (जो इलेक्ट्रॉनिक चीजों का दिमाग होता है), ग्रीन हाइड्रोजन और नए-नए आविष्कार.  PM मोदी वहां के प्रधानमंत्री के साथ वहां के शादी परिवार से भी मुलाकात करेंगे. इस दौरान भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है.

3. स्वीडन- 17 से 18 मई: अब बारी है स्वीडन की. यहां  PM मोदी प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन से बात करेंगे. यहां चर्चा का मुद्दा होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, रक्षा, अंतरिक्ष और हमारे देश के नए स्टार्टअप्स को वहां कैसे बढ़ावा दिया जाए. इसके अलावा, पर्यावरण को बचाने वाली हरित क्रांति पर भी खूब बात होगी. दोनों प्रधानमंत्री यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ एक प्रमुख बिजनेस फोरम ‘यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री’ को भी संबोधित करेंगे. यहां एक बड़ा बिजनेस फोरम भी होगा जिसमें यूरोप की बड़ी-बड़ी कंपनियों के लोग आएंगे.

4. नॉर्वे- 18 से 19 मई: ये सबसे खास है. 43 सालों में कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री नॉर्वे नहीं गया है. अब इतने लंबे समय बाद  PM मोदी वहां जा रहे हैं. बड़ी बात ये है कि वो ‘भारत-नॉर्डिक’ नाम के एक बड़े शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, जिसमें नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता एक साथ होंगे. वहां के प्रधानमंत्री के साथ अलग से भी बैठक होगी. बातचीत का एजेंडा है हरित ऊर्जा, आर्कटिक क्षेत्र में मिलकर काम करना और समुद्री संसाधनों से जुड़ी नीली अर्थव्यवस्था. तो ये एक तरह से बिल्कुल नए रास्ते और नई संभावनाएं खोलने वाला दौरा है.

5. इटली- 19 से 20 मई: यहां  PM मोदी की मुलाकात प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति से होगी. ये मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों नेता कुछ समय पहले ही G7 सम्मेलन में मिले थे. यहां वो पिछली बैठकों में तय की गई एक ‘संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना’ की समीक्षा करेंगे. इस योजना में रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और व्यापार जैसी चीजें शामिल हैं. मतलब, पुरानी बातों को आगे बढ़ाने और रफ्तार देने की तैयारी है.

PM मोदी की पूरी यात्रा का सबसे बड़ा मकसद क्या है?

ये सिर्फ इधर-उधर जाकर हाथ मिलाने और फोटो खिंचाने का दौरा नहीं है. इसके पीछे पूरी प्लानिंग और कई बड़े मकसद हैं:

  • ऊर्जा की चिंता दूर करना: आज के हालात में सबसे बड़ा डर यही है कि तेल-गैस की सप्लाई में कोई रुकावट न आ जाए. तो UAE और नॉर्वे जैसे देशों के साथ बात करके भारत अपनी जरूरतों की सप्लाई पक्की करना चाहता है.
  • नया कारोबार और निवेश लाना: भारत-यूरोप के बीच अभी-अभी एक बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हुआ है. इस यात्रा के जरिए उसे तेजी से लागू करने और नई डील पक्की करने में मदद मिलेगी.
  • भविष्य की तकनीक में मदद लेना: नीदरलैंड से पानी मैनेजमेंट की तकनीक, स्वीडन से AI और स्टार्टअप की समझ लेना है. ये सब उधार नहीं लेना, बल्कि मिलकर काम करना है ताकि हमें भी फायदा हो.
  • दुनिया में अपनी मजबूत जगह बनाना: इस पूरी यात्रा से एक बड़ा संदेश जाता है कि चाहे दुनिया में कितनी भी उथल-पुथल क्यों न हो, भारत अपनी राह खुद चुनने वाला एक मजबूत और भरोसेमंद देश है. वो यूरोप और खाड़ी देशों सबके साथ मिलकर काम कर सकता है.

तो कुल मिलाकर, ये एक बहुत बड़ा रणनीतिक दांव है जिससे भारत एक साथ अपनी ऊर्जा सुरक्षा, नई टेक्नोलॉजी, व्यापार और दुनिया में अपनी ताकत, सब कुछ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.



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