मुंबई स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साइप्रस आधारित ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म परिमैच से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, दमन और उत्तर प्रदेश में कुल 17 जगहों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई 26 मई 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के तहत की गई. ED के मुताबिक, छापेमारी के दौरान करीब 1.56 करोड़ रुपये की चल संपत्ति जब्त की गई. इसमें लगभग 1.2 करोड़ रुपये नकद शामिल हैं. इसके अलावा अलग-अलग बैंक खातों में जमा करीब 3.8 करोड़ रुपये की रकम फ्रीज की गई है. जांच के दौरान एजेंसी को कई जरूरी दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी मिले हैं.
ED ने यह जांच मुंबई साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी. आरोप है कि Parimatch ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर ठगी कर रहा था. जांच में सामने आया है कि इस प्लेटफॉर्म ने एक साल में 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया. जांच एजेंसी के अनुसार, प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों ने यूजर्स के पैसे जमा कराने और उन्हें अलग-अलग खातों में घुमाने के लिए बड़ा नेटवर्क तैयार किया था. इसमें म्यूल अकाउंट्स, पेमेंट इंटरमीडियरी और कई फाइनेंशियल चैनलों का इस्तेमाल किया गया.
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ED की जांच में क्या पता चला?
ED की जांच में यह भी पता चला कि कई मामलों में यूजर्स को भुगतान सीधे प्लेटफॉर्म के खातों से नहीं किया जाता था. इसके बजाय दूसरे यूजर्स की तरफ से जमा की गई रकम को अलग-अलग हिस्सों में ट्रांसफर कर भुगतान किया जाता था, ताकि असली मनी ट्रेल छिपाई जा सके. एजेंसी के मुताबिक, सॉफ्टवेयर, फिनटेक और टेक्नोलॉजी कंपनियों के नाम पर खोले गए कई चालू खातों का इस्तेमाल बेटिंग से जुड़े लेन-देन के लिए किया जा रहा था. इन खातों का उपयोग यूजर डिपॉजिट जमा करने और पेमेंट गेटवे, बिजनेस ट्रांजैक्शन और वेंडर पेमेंट के नाम पर पैसे भेजने के लिए किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) नेटवर्क, मोबाइल मनी ट्रांसफर एजेंट, ग्राहक सेवा केंद्र, कैश मैनेजमेंट सर्विस (CMS), किराना दुकानों और रिटेल आउटलेट्स का भी इस्तेमाल फंड ट्रांसफर के लिए किया जा रहा था.
नेटवर्क के जरिए अलग-अलग जगह भेजता था
ED के अनुसार, एक ऐसा सिस्टम बनाया गया था जिसमें यूजर्स का पैसा पहले रिटेलर्स और ग्राहक सेवा केंद्रों तक पहुंचता था. इसके बाद उसे BC नेटवर्क के जरिए अलग-अलग जगह भेजा जाता था ताकि पैसों के असली स्रोत को छिपाया जा सके. कुछ एजेंटों पर आरोप है कि उन्होंने CMS चैनलों से मिली नकदी को RTGS ट्रांसफर के जरिए एडजस्ट कर असली स्रोत छिपाने की कोशिश की. बाद में यह रकम हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजी जाती थी. जांच में यह भी सामने आया कि परिमैच ने परिमैच स्पॉर्टस और परिमैच न्यूज जैसे नामों से बड़े स्तर पर प्रचार किया. प्लेटफॉर्म ने भारत के 15 से ज्यादा राज्यों में स्थानीय क्रिकेट लीग, हॉकी और फुटबॉल टूर्नामेंट को स्पॉन्सर किया. इसके अलावा क्विक-कॉमर्स ऐप्स के जरिए ग्रॉसरी डिलीवरी के साथ प्रचार सामग्री भेजकर नए यूजर्स जोड़ने की कोशिश भी की गई. ED ने अब तक इस मामले में कुल 112 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की है. फिलहाल मामले की जांच जारी है.
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