- प्रदर्शन में शामिल होना, जमानत से वंचित करने का आधार नहीं।
- आर्थिक लेन-देन ही मुख्य आरोप, प्रदर्शन को निर्णायक नहीं माना।
- 32 करोड़ के केस में सिर्फ 3.15 लाख का आरोप।
- 2025 में जोड़ा गया नाम, जमानत के पक्ष में तथ्य।
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसकी राजनीतिक शाखा SDPI से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी प्रदर्शन या विरोध गतिविधि में शामिल होना अपने आप में ऐसा आधार नहीं है, जिसके दम पर किसी आरोपी को जमानत से वंचित कर दिया जाए. दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने यह अहम टिप्पणी करते हुए आरोपी वहीदुर रहमान को नियमित जमानत दे दी. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में मुख्य आरोप आर्थिक लेन-देन से जुड़े हैं, ऐसे में सिर्फ प्रदर्शन में भागीदारी को निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता है.
विरोध प्रदर्शन को हथियार बनाकर बेल नहीं रोकी जा सकती- कोर्ट
ईडी ने दिल्ली हाई कोर्ट में दावा किया था कि वहीदुर रहमान PFI से जुड़ा था और उसने कई बैंक खातों के जरिए पैसों की लेयरिंग कर रकम SDPI तक पहुंचाने में भूमिका निभाई एजेंसी ने आरोपी के ईमेल, फोन कॉन्टैक्ट्स और PFI बैन के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में उसकी कथित मौजूदगी का भी हवाला दिया, लेकिन हाई कोर्ट ने ईडी की इन दलीलों पर सवाल उठाए.
कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी संगठन से पेशेवर तौर पर जुड़ा है तो उसके फोन या ईमेल में उस संगठन का नाम होना कोई असामान्य या संदिग्ध बात नहीं मानी जा सकती है.
32 करोड़ के केस में सिर्फ 3.15 लाख का आरोप
दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी गौर किया कि ईडी पूरे मामले में SDPI खातों में 32.94 करोड़ रुपये आने का दावा कर रही है, लेकिन वहीदुर रहमान पर सिर्फ 3.15 लाख रुपये के लेन-देन का आरोप है. कोर्ट ने माना कि आरोपी की भूमिका सीमित दिखाई देती है.
2022 में दर्ज हुआ था केस, लेकिन नाम आया 2025 में
हाई कोर्ट ने यह भी नोट किया कि ECIR 2022 में दर्ज हुई थी, लेकिन आरोपी का नाम पहली बार मई 2025 में दाखिल सातवीं सप्लीमेंट्री शिकायत में जोड़ा गया. कोर्ट ने इसे भी जमानत के पक्ष में महत्वपूर्ण तथ्य माना.
PFI पर बैन से पहले के प्रदर्शन को आधार नहीं बना सकते- कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि जिन प्रदर्शनों में शामिल होने की बात कही जा रही है. वे उस समय हुए थे जब PFI को गैरकानूनी संगठन घोषित नहीं किया गया था. इसलिए केवल उन गतिविधियों के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता.
250 गवाह, 600 दस्तावेज, ट्रायल लंबा चलने के आसार
कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी पिछले एक साल दो महीने से जेल में बंद है. जबकि केस अभी आरोप तय होने की शुरुआती स्टेज में ही है. मामले में करीब 250 गवाह और 600 से ज्यादा दस्तावेज हैं, ऐसे में ट्रायल लंबा चलने की संभावना है. इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने वहीदुर रहमान को सख्त शर्तों के साथ नियमित जमानत दे दी.
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