- रिपोर्ट के आधार पर कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया।
Telangana News: तेलंगाना हाई कोर्ट ने कालेश्वरम परियोजना मामले में बुधवार (22 अप्रैल, 2026) को एक अहम अंतरिम फैसला सुनाया. कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जस्टिस पी. सी. घोष आयोग की रिपोर्ट के आधार पर कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस फैसले से पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव को बड़ी राहत मिली है.
कालेश्वरम प्रोजेक्ट में अनियमितता और पैसे के दुरुपयोग का था आरोप
कालेश्वरम परियोजना के निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस पी. सी. घोष की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया था. इस आयोग ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. हालांकि, इस रिपोर्ट के कुछ निष्कर्षों से केसीआर और हरीश राव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका थी. यह मानते हुए कि इस रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, केसीआर और हरीश राव ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
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हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जनरल मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपनी बात स्पष्ट की. हाई कोर्ट ने कहा कि कालेश्वरम परियोजना में अनियमितताओं की जांच के लिए आयोग का गठन करना राज्य सरकार का एक वैध और कानूनी कदम था. इसमें कोई गलती नहीं है. यह भी कहा कि रिपोर्ट तैयार करते समय आयोग ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया. याचिकाकर्ताओं (केसीआर, हरीश राव, एस. के. जोशी और स्मिता सभरवाल) को अपनी बात रखने और सबूत पेश करने का उचित अवसर नहीं दिया गया. कोर्ट ने इसे जस्टिस पी. सी. घोष आयोग की प्रक्रिया में सबसे बड़ी कमी बताया.
इन्हीं खामियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्ष अप्रभावी (inoperative) रहेंगे. इसका मतलब है कि फिलहाल इन निष्कर्षों को कोई कानूनी मान्यता नहीं होगी. कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे इस रिपोर्ट के आधार पर कोई न्यायिक, आपराधिक या प्रशासनिक कार्रवाई न करें.
हाई कोर्ट के फैसले से कांग्रेस नाखुश, SC में अपील करेगी सरकार
इस अंतरिम फैसले से कालेश्वरम मामले में राजनीतिक करवट बदल गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बीआरएस के लिए राहत भरा है. बीआरएस पार्टी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि सच्चाई सामने आ गई है और यह सरकार के लिए एक बड़ा झटका है.
वहीं, कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि यह सिर्फ एक अंतरिम आदेश है और वे सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ अपील करेगी. संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार अगले दो-तीन दिनों में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है. इस बीच, हाई कोर्ट के इस फैसले पर केसीआर और हरीश राव की प्रतिक्रिया को लेकर भी सभी की निगाहें हैं.
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