जिंदल ग्रुप पर ED ने कसा शिकंजा, 505 करोड़ रुपये देश से बाहर भेजने का आरोप, छापेमारी में मिले अहम सबूत



प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत 18 और 19 सितंबर, 2025 को दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद में बी. सी. जिंदल ग्रुप से जुड़े 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी. ये कार्रवाई विदेश में अवैध तरीके से पैसा भेजने और फंड्स को पार्क करने के शक में की गई.

जांच में सामने आया है कि जिंदल इंडिया थर्मल पावर लिमिटेड (JTPL), जिंदल इंडिया पावरटेक लिमिटेड (JIPL) और जिंदल पॉली फिल्म्स लिमिटेड (JPFL) जैसी कंपनियों ने करोड़ों रुपये विदेश भेजे. आरोप है कि 505.14 करोड़ रुपये दुबई की कंपनी टोपाज इंटरप्राइजेज डीएमसीसी (Topaz Enterprise DMCC) को भेजे गए, जो सीधे-सीधे शुभद्रा जिंदल, उनके बेटे भावेश जिंदल और श्याम सुंदर जिंदल के कंट्रोल में है.

ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?

ED को जांच में पता चला कि साल 2013 से 2017 के बीच JPFL ने 703.79 करोड़ रुपये JIPL में निवेश किए, ताकि ओडिशा में कोयले पर आधारित पावर प्लांट लगाया जा सके. लेकिन 2018-19 में कंपनी ने ये निवेश वसूलने के बजाय अपने ही प्रमोटर्स और ग्रुप कंपनियों को बहुत कम दामों पर बेच दिया, जिससे लिस्टेड कंपनी के निवेशकों का भारी नुकसान हुआ.

इसके बाद 2024 में JIPL को 853.72 करोड़ रुपये मिले, लेकिन इसे JPFL को लौटाने की बजाय 505.14 करोड़ रुपये दुबई की कंपनी टोपाज एंटरप्राइज DMCC में ट्रांसफर कर दिए गए. इसी रकम से उन्होंने गार्नेट इंटरप्राइज डीएमसीसी (Garnet Enterprise DMCC) के 100 प्रतिशत शेयर खरीदा लिए.

पैसों की हेराफेरी करने के लिए तैयार किए गए थे दो अलग-अलग वैल्यूएशन रिपोर्ट

जांच में ED को ये भी मिला है कि गर्नेट एंटरप्राइज DMCC, दुबई की हिस्सेदारी जिंदल पॉली फिल्म्स नीदरलैंड्स B. V. में है और ये आगे कई देशों जैसे अमेरिका, बेल्जियम, लक्जमबर्ग, जर्मनी, सिंगापुर और चीन में कंपनियों को कंट्रोल करती है. जांच में सामने आया कि दो अलग-अलग वैल्यूएशन रिपोर्ट तैयार करवाई गई, ताकि कंपनी की कीमत को झूठा दिखाकर ज्यादा पैसा बाहर भेजा जा सके. ED का शक है कि बी. सी. जिंदल ग्रुप ने अपनी ही रकम को राउंड-ट्रिपिंग के जरिए विदेश भेजा और वहां खड़ा किया, जो FEMA के नियमों का उल्लंघन है.

ईडी की छापेमारी में मिले कई अहम दस्तावेज और सबूत

ईडी की छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड मिले है. इनमें साफ दिखता है कि श्याम सुंदर जिंदल इन विदेशी कंपनियों के वास्तविक मालिक और 100 प्रतिशत के शेयर होल्डर है. फिलहाल श्याम सुंदर जिंदल भारत में मौजूद नहीं है. बताया जा रहा है कि वे हांगकांग गए हुए है और अब तक जांच में शामिल नहीं हुए है. ED ने कहा है कि पूरे मामले की जांच जारी है और आगे और खुलासे हो सकते है.

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