पश्चिम बंगाल में शुभेंदु कैबिनेट का सोमवार (1 जून) को विस्तार होगा. कुल 35 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे. दोपहर 11 बजे गवर्नर आर. एन. रवि लोकभवन में सदस्यों को शपथ दिलााएंगे. संभावित मंत्रियों की लिस्ट भी सामने आई है. जिसमें रूपा गांगुली, अशोक डिंडा और तपस रॉय का नाम सामने आया है.
ये विधायक बन सकते हैं मंत्री- सूत्र
– शंकर घोष, सिलीगुड़ी से विधायक
– मालती राव रॉय, तुफानगंज, कूचबिहार से विधायक
– मनोज उरांव, विधायक, कुमारग्राम, अलीपुरद्वार
– बिशाल लामा, कालचीनी से विधायक
– फालाकाटा से दीपक बर्मन
– आनंदमय बर्मन, माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी से विधायक
– तपस रॉय, मानिकतला से विधायक
– शरद्वात मुखर्जी, बिधाननगर से विधायक
– श्यामपुकुर से पूर्णिमा चक्रवर्ती
– इंद्रनील खान, बेहाला पश्चिम से विधायक
-जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, सिउरी, बीरभूम से विधायक
– हावड़ा उत्तर से उमेश राय
– अशोक डिंडा, पूर्वी मेदिनीपुर के मोयना से विधायक
– अर्जुन सिंह, उत्तर 24 परगना के नोआपाड़ा से विधायक
– सुमित्रा चट्टोपाध्याय, नैहाटी से विधायक
– सुमना सरकार, बालागढ़, हुगली से विधायक
– मुर्शिदाबाद से गौरीशंकर घोष
– रूपा गंगोपाध्याय, सोनारपुर दक्षिण से विधायक
– गार्गी दास घोष, कांडी, मुर्शिदाबाद से विधायक
9 मई को शुभेंदु ने ली थी बंगाल के CM पद की शपथ
शुभेंदु ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में नौ मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. शुभेंदु के साथ भाजपा विधायकों दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निसिथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी.
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कैबिनट में होंगे 41 मंत्री
मंत्रिपरिषद में 35 विधायकों को शामिल किए जाने के बाद मंत्रियों की कुल संख्या 41 हो जाएगी जो 294 सदस्यीय विधानसभा में किसी सरकार के लिए मंत्रियों की अधिकतम संख्या से तीन कम है. छह सदस्यीय मौजूदा मंत्रिमंडल भाजपा के सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के प्रयास को दर्शाता है, जिसमें ब्राह्मण, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आदिवासी, मतुआ और राजबंशी समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है.
बीजेपी ने जीती थीं 208 सीटें
हाल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 208 सीट हासिल की थीं. इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत हो गया और भाजपा ने पूर्वी भारत में अपनी सबसे बड़ी चुनावी सफलता दर्ज की.