US-Pakistan Deal: अमेरिका निकालेगा पाकिस्तान का ‘खजाना’, शरीफ ने बेस्ट फ्रेंड को धोखा देकर थामा ट्रंप का हाथ, 50 करोड़ डॉलर की डील


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर रूसी तेल खरीदने की वजह से 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है. इसी बीच अमेरिका ने एक नया कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ खनिज निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

अमेरिका की यूएस स्ट्रैटेजिक मेटल्स कंपनी और पाकिस्तान के फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन के बीच यह समझौता हुआ है. इसके तहत 50 करोड़ डॉलर का निवेश किया जाएगा और पाकिस्तान में एक पॉली-मेटैलिक रिफाइनरी स्थापित की जाएगी. इस समझौते को अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हालिया व्यापारिक समझौते का विस्तार माना जा रहा है.

पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ लंबे समय से दावा कर रहे हैं कि पाकिस्तान के पास खरबों डॉलर के खनिज भंडार हैं. उनका मानना है कि अगर विदेशी निवेश इस क्षेत्र में आता है तो पाकिस्तान अपनी कंगाली और विदेशी कर्ज़ों से उबर सकता है. इस डील से पाकिस्तान को तांबा, सोना, टंगस्टन और दुर्लभ मृदा जैसे खनिजों के निर्यात में मदद मिलेगी. सरकार का कहना है कि इस साझेदारी से बड़े पैमाने पर खनन और खनिज प्रसंस्करण की परियोजनाएं शुरू होंगी.

बलूचिस्तान सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि, इस निवेश के साथ कई खतरे भी जुड़े हैं. पाकिस्तान की अधिकांश खनिज संपदा बलूचिस्तान प्रांत में है. यह इलाका लंबे समय से अलगाववाद और उग्रवाद से प्रभावित है. बलूच विद्रोही पहले भी विदेशी कंपनियों को निशाना बना चुके हैं. चीनी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स पर हमले पहले ही हो चुके हैं. हाल ही में अमेरिका ने बलूचिस्तान नेशनल आर्मी और उसकी शाखा मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी संगठन घोषित किया था. इन हालात में अमेरिकी निवेश को भी विद्रोहियों की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.

चीन से रिश्तों में दरार का खतरा
शहबाज़ शरीफ की दूसरी बड़ी चिंता चीन है. पाकिस्तान के सबसे बड़े निवेशक और कर्जदाता के रूप में चीन का देश की अर्थव्यवस्था में गहरा असर है. अमेरिका और चीन पहले से ही व्यापार युद्ध और वैश्विक प्रभुत्व की लड़ाई में उलझे हैं. अगर पाकिस्तान अमेरिकी निवेश को प्राथमिकता देता है तो चीन नाराज़ हो सकता है. पाकिस्तान पर चीन का भारी कर्ज बोझ है. यदि रिश्ते बिगड़े तो उसका असर वित्तीय मोर्चे पर गंभीर हो सकता है. इस डील के बाद पाकिस्तान पर दबाव बढ़ेगा कि वह दोनों महाशक्तियों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखे.

पुर्तगाली कंपनी संग भी करार
अमेरिकी निवेश के साथ-साथ पाकिस्तान ने पुर्तगाल की मोटा-एंगिल ग्रुप के साथ भी समझौता किया है. इस डील के तहत पाकिस्तान के नेशनल लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन और मोटा-एंगिल ग्रुप मिलकर खनिज और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे. इससे साफ है कि पाकिस्तान खनन क्षेत्र में बहुपक्षीय निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है और यही बात शरीफ को टेंशन दे रही है.

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